
बांस के फर्निचर ने दी विसडालिया को नई पहचान, राष्ट्रीय बांस मिशन में कलस्टर के रूप में हुआ शामिल
एक छत के नीचे बांस के हर डिजाइन के फर्नीचर और कंस्ट्रक्शन के साथ मसाला मशरूम, क्राफ्ट, अनाज और सब कुछ। आदिवासियों के व्यंजनों से बना एक रेस्टोरेंट भी। यहां से बने उत्पाद खासकर बांस के डिजाइनर फर्नीचर देश के सभी राज्यों के अलावा निर्यात भी होते हैं।
संजीव सिंह @ सूरत.
आत्मनिर्भर भारत के तहत केन्द्र सरकार सभी छोटे-बड़े उद्योग, खेती-बाड़ी और नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। दक्षिण गुजरात में सूरत जिले की मांडवी तहसील में स्थित विसडालिया में आदिवासियों द्वारा निर्मित बांस के फर्निचर की देश में मांग बढ़ी हैं। कृषि मंत्रालय ने नौ राज्यों में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत 22 कलस्टर शुरू करने की घोषणा की है। इसमें गुजरात में दक्षिण गुजरात के सूरत जिले में स्थित विसडालिया कलस्टर को भी शामिल किया जाना आदिवासियों के लिए गौरव की बात है।
केन्द्र सरकार किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। उद्योग-धंधों और किसानों की आमदनी से जुड़ी एक योजना है राष्ट्रीय बांस मिशन। सरकार देश में बांस की पैदावार बढ़ाने और बांस आधारित उद्योग-धंधों को गति देने पर फोकस कर रही है। देश अब बांस उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के लिए कमर कस रहा है। बांस के क्लस्टर की स्थापना नौ राज्य मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम, नागालैंड, त्रिपुरा, उत्तराखंड और कर्नाटक में की जाएगी। गुजरात में दक्षिण गुजरात के सूरत जिले की मांडवी तहसील में विसडालिया कलस्टर घोषित किया है। जिला वन अधिकारी (आइएफएस) पुनीत नैयर ने बताया कि पिछले तीन साल से विसडालिया को बांस की खेती तथा उत्पादों को तैयार करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें आसपास के 33 गांवों को जोड़ते हुए वन समिति सदस्यों का चयन किया गया है। कोटवालिया आदिवासी बांस के उत्पादों को निर्मित करने में महारत हांसिल है। लेकिन इन्हें ट्रेण्ड करके स्किल्ड आर्टिस्ट के तौर पर तैयार किया गया है। फर्निचर, ज्वैलरी, कप, मग समेत कंस्ट्रक्शन में उपयोग होने वाली कई सामग्री इनके द्वारा तैयार की जाती है।
इसके अलावा मशाला मेकिंग, दाल, बेकरी, रेस्टोरेंट, मशरूम प्रोडक्ट्स भी तैयार किए जाते है और एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह रूलर मॉल में उत्पादों को बेचने की व्यवस्था की गई है। पहले एक बांस कलाकार को रोजाना के हिसाब से 120 रुपए मजदूरी दी जाती थी। अब यह बढक़र 300 रुपए तक पहुंच गई हैं। हाल में विसडालिया कलस्टर में सीधे तौर पर 150 श्रमिक और अप्रत्यक्ष रूप से पांच से छह सौ श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। अब जब कृषि मंत्रालय ने राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत विसडालिया कलस्टर को शामिल किया है तब बांस कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब इस विसडालिया क्षेत्र के और विकास करने की राह आसान हो गई है। इस घोषणा के बाद स्थानीय आदिवासी, बांस कलाकार, ट्रेण्ड महिलाओं में खुशी है और आर्थिक उत्थान में मदद की उम्मीद से नई ऊंचाई तक पहुंचने की आस जगी है।
देश में फर्निचर की मांग बढ़ी, पांच साल की वारंटी भी
मांडवी के विसडालिया कलस्टर में निर्मित बांस के फर्निचर, झूले व दूसरे उत्पाद की गुजरात के विभिन्न शहरों के अलावा राजस्थान, छत्तीसगढ़, नई दिल्ली, महाराष्ट्र और झारखंड समेत अन्य राज्यों में मांग बढ़ी हैं। देश में बांस के उत्पादों को अच्छी पहचान मिले और भरोसा बढ़ाने के लिए पांच साल की वारंटी दी जाती है। समय-समय पर यहां के कारीगर उत्पादों को बेचने के बाद फॉलोअप भी लेते है। इससे विसडालिया कलस्टर ने देश में अच्छा मुकाम हांसिल किया है। वन अधिकारियों ने बताया कि रूरल मॉल की वार्षिक आय वर्ष 2018-19 में 55 लाख रुपए थी जो वर्ष 2019-20 में बढक़र एक करोड़ दस लाख तक पहुंच गई हैं।
आदिवासी कलारों को मिलेगी नई राह
विसडालिया कलस्टर में स्थित रूरल मॉल कम्यूनिटी ओनरशिप का एक अच्छा उदाहरण है। इससे आसपास के इलाकों के साथ-साथ ट्रायबल इकोनोमी बुस्ट हुई है। ग्रामिण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन कम हुआ है। दूसरी तरफ आसपास के जंगल एरिया पर भी पॉजिटिव इम्पैक्ट आया है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत विसडालिया को शामिल करने से यहां के बांस फर्निचर और आदिवासी कलाकारों को नई राह मिलेगी।
पुनीत नैयर (आइएफएस), जिला वन अधिकारी, सूरत।
Published on:
13 Sept 2020 10:44 pm

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