नवरात्र के नौ दिन मिट्टी के घड़े की 'गरबा' के रूप स्थापना कर देवी को आराधना की जाती है। दशहरे पर इस 'गरबा' को तापी में या फिर मंदिरों में विसर्जित किया जाता है। सूरत के गोपीपुरा स्थित श्री चंद्र अशोक सोम करुणा चकली घर संस्था पिछले नौ सालों से विसर्जित 'गरबा' को चिड़ियाओं के घर बनाकर उसका रीसर्जन कर रही है। धार्मिक आस्था और प्रकृति से विद्यार्थियों को अवगत करवाने के उद्देश्य से इन 'गरबा' में से चिड़ियाओं का घर बनाने का स्कूलों में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
नवरात्र में 'गरबा' के अंदर अखंड दीप जलाकर देवी की आराधना की जाती है और दशहरे पर 'गरबा' को विसर्जित कर दिया जाता है। पिछले कुछ सालो से सूरत की जनता तापी को शुद्ध रखने के लिए जागरूक हुए है। इसलिए अब गणेशजी, दशामा, कृष्ण और अंबे की प्रतिमा को तापी में विसर्जित नहीं किया जाता। इन प्रतिमाओं को डुमस के समुद्र या फिर कुत्रिम तालाब में विसर्जित किया जाने लगा है। देवी का 'गरबा' भी विसर्जित करने की प्रथा है। तापी को शुद्ध रखने के उद्देश्य से नौ साल पहले श्री चंद्र अशोक सोम करुणा चकली घर संस्था ने 'गरबा' BEST FROM WEST को एकत्रित कर उसमे से चिड़ियाओं के घर बनाना शुरू किया। चिड़ियाओं के लिए घर बनाकर इन्हें नि:शुल्क वितरित किया जाता है।
- अब तक एक लाख से अधिक चिड़िया घर किए वितरित:
संस्था को शुरुआत में मिट्टी के घड़ों से चिड़िया घर बनाने में काफी दिक्कत होती थी। 10 घड़ों में से 9 घड़े फूट जाते थे। मुश्किल से एक चिड़िया घर बन पाता था। लेकिन धीर धीरे मिट्टी के घड़ों से चिड़िया घर बनाना सीख गए। BEST FROM WEST चिड़िया घर बनाने के लिए विशेष ओजार भी बनवाए गए हैं। नौ सालों में संस्था ने एक लाख से अधिक 'गरबों' में से चिड़िया घर बनाकर घरों, सार्वजनिक स्थलों, पेड़ों और बगीचों में नि:शुल्क लगवाए हैं।
- विद्यार्थी बनाएंगे चिड़ियाओं के लिए घर:
बच्चे गरबे का महत्व समझे साथ ही इन गरबों में से चिड़ियाओं का घर बन सकता है यह भी जान ले इसलिए उन्हीं से चिड़िया घर बनाने का तय किया गया है। संस्था ने तापी किनारों और मंदिरों से एकत्रित किए 'गरबाओं' को कई स्कूलों में वितरित कर विद्यार्थियों को BEST FROM WEST चिड़ियाओं का घर बनाने का प्रशिक्षण भी देना शुरू कर दिया है।
- विसर्जन से सीखेंगे रीसर्जन:
गरबों का मान बना रहे और तापी प्रदूषण से बची रहे इसलिए BEST FROM WEST चिड़िया घर बनाना शुरू किया गया था। आज लोग सामने से गरबों को ले जाने के लिए सूचित करने लगे है। लोग जागरूक हो गए हैं, इस कारण नौ सालों में एक लाख से अधिक चिड़िया घर सूरत में जगह जगह लगाए जा चुके है। इस साल अभी तक 20 हजार से अधिक गरबे एकत्रित किए जा चुके है। आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ेगी। इसलिए 20 हजार से अधिक चिड़िया घर बनाने का लक्ष्य है। विद्यार्थी विसर्जन में से रीसर्जन सीखे इसलिए उन्हें भी इस कार्य में शामिल किया गया है।
- धरणेन्द्र संघवी, श्री चंद्र अशोक सोम करुणा चकली घर संस्था