नगर प्राथमिक शिक्षा समिति के स्कूल नंबर 175 महारानी ताराबाई स्कूल में प्रार्थना के बाद प्रतिदिन गीता के एक श्लोक पर होती है चर्चा
सूरत. शहर के एक स्कूल में गीता के माध्यम से मानव मूल्यों के सिंचन और भारतीय संस्कृति से विद्यार्थियों को परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। नगर प्राथमिक शिक्षण समिति के नवागाम स्थित 175 नंबर के महारानी ताराबाई प्राथमिक स्कूल में विद्यार्थियों को श्रीमद्भागवत गीता का पाठ कराया जा रहा है। स्कूल में प्रार्थना के बाद नियमित रूप से गीता के एक श्लोक पर चर्चा होती है।
स्कूल के आचार्य काशीनाथ जाधव ने बताया कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से रिश्तों में दरार बढ़ रही है। भारतीय संस्कृति और मानव मूल्यों को हम भूल रहे हैं। यह देखते हुए विद्यार्थियों में मानव मूल्यों के सिंचन के साथ अपनी संस्कृति से परिचित कराने की कोशिश शुरू की है। इसके तहत स्कूल में गीता के श्लोक का पठन शुरू किया गया है। कक्षा 6 से 8 की छात्राओं को प्रतिदिन गीता का एक श्लोक भावार्थ के साथ कंठस्थ करने के लिए कहा जाता है। प्रार्थना के बाद श्लोक के पठन के साथ शिक्षक उसका भावार्थ समझाते हैं।
घर पर परिवार के साथ गीता का पठन
शिक्षिका माधुरी लवंगडे ने बताया कि छात्राओं को प्रार्थना के बाद गीता का श्लोक समझाने के साथ ही उन्हें घर पर भी माता-पिता के साथ बैठकर गीता के पठन के लिए कहा गया है। सभी छात्राएं इसका पालन भी कर रही हैं। प्रतिदिन वीडियो और तस्वीरों के जरिए यह सुनिश्चित भी किया जा रहा है।
छात्राएं और शिक्षकों को भेंट की गीता
शिक्षिका मीनाक्षी जगताप ने बताया कि कई छात्राओं के पास श्रीमद्भागवत गीता नहीं थी। उन्हें और शिक्षकों को स्कूल की ओर से गीता भेंट की गई। सितंबर महीने से शुरू एए इस प्रयोग का सकारात्मक परिणाम छात्राओं में देखने को मिल रहा है।