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demolition : रघुकुल मार्केट के पास 40 साल पुरानी मोहम्मदी मस्जिद पर चला बुलडोजर

- कड़ी पुलिस सुरक्षा में रेलवे ने अपने सीमाक्षेत्र से हटाया अवैध निर्माण

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demolition : रघुकुल मार्केट के पास 40 साल पुरानी मोहम्मदी मस्जिद पर चला बुलडोजर,demolition : रघुकुल मार्केट के पास 40 साल पुरानी मोहम्मदी मस्जिद पर चला बुलडोजर

सूरत. आंजणा स्थित रघुकुल मार्केट के पास मगदुमनगर में स्थित मोहम्मदी मस्जिद पर गुरुवार को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में रेलवे ने बुलडोजर चला कर निर्माण कार्यध्वस्त कर दिया। हालांकि रेलवे ने सूरत मनपा की सीमा में पडऩे वाला मस्जिद की दीवार का एक हिस्सा छोड़ दिया। जानकारी के अनुसार गत 5 जनवरी को रेलवे ने आंजणा समेत अन्य इलाकों में रेलवे पटरी के दोनों तरफ रेलवे की सीमा में बनी झोपड़पट्टियों पर बड़े पैमाने पर बुलडोजर चला कर अवैध निर्माण हटाया था।

उस दौरान रघुकुल मार्केट के ठीक बगल में रेलवे गरनाले के पास मगदुमनगर झोपड़पट्टी में अवैध रूप से बनी कबाड़ की दुकानों को हटाया गया था। इन दुकानों के पीछे बनी मोहम्मदी मस्जिद को छोड़ दिया गया था। उस समय पर मस्जिद को नहीं हटाया गया था। उसके बाद बुधवार रात को मस्जिद के ट्रस्टियों को डिमोलेशन की सूचना दी गई। गुरुवार सुबह आठ बजे ही सलाबपुरा पुलिस के साथ रेलवे का प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। मौके पर मस्जिद के ट्रस्टियों समेत कुछ लोग भी जमा हो गए।

उन्होंने अचानक हो रही इस कार्रवाई का विरोध किया और मस्जिद को ध्वस्त नहीं करने की गुहार भी लगाई। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। चंद मिनटों में ही बुलडोजरो ने मस्जिद के निर्माण कार्य ध्वस्त कर दिया। रेलवे ने पटरी के कंपाउन्ड वाल की सीमा में आने वाला मस्जिद का संपूर्ण हिस्सा ढहा दिया। सिर्फ मनपा के सीमाक्षेत्र में पडऩे वाली सडक़ से जुड़ी मुख्य दरवाजे वाली दीवार को छोड़ दिया।

किराया नहीं, स्थाई मकान की मांग

पूर्व में मगदुमनगर झोपड़पट्टी क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने बताया कि झोपड़पट्टी की डिमोलेशन के बाद से उन्हें रेलवे द्वारा दो हजार रुपए मासिक किराया दिया जा रहा है। लेकिन उन्हें रहने के लिए स्थाई मकान की जरुरत हैं। हमारा रेलवे से अनुरोध हमें नजदीक में ही कहीं स्थाई निवास दिया जाए ताकि हमें किराए के मकानों के लिए भटकना नहीं पड़े। दो हजार रुपए में मकान तो क्या एक कमरा भी नहीं मिल पा रहा हैं।

नहीं दिया नोटिस, कोर्ट में दायर की थी याचिका

झोपड़पट्टी का डिमोलेशन होने के बाद हमने मस्जिद को बचाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने हमें सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारिख दी थी। गुरुवार की कार्रवाई को लेकर रेलवे की ओर से हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया। सिर्फ सुबह मौखिक रूप से बताया गया और फिर कार्रवाई शुरू कर दी गई। मस्जिद में मौजूद सामान निकालने के लिए पूरा समय नहीं दिया गया। हम आधा सामान ही निकाल पाए।
- मोहम्मद फारुख (ट्र्स्टी, मोहम्मदी मस्जिद)

सीधी दीवार निकालते तो बच जाती मस्जिद

मोहम्मदी मस्जिद का निर्माण करीब चालिस साल पूर्व हमारे पुरखों ने करवाया था। जब यहां मगदुमनगर झोपड़पट्टी थी तो पटरी के 65 मीटर की सीमा पर रेलवे ने अपना निशान भी लगाया था। मस्जिद रेलवे सीमा क्षेत्र से बाहर थी। रेलवे ने जानबूझ कर मस्जिद को हटाने के लिए पटरी के समानान्तर बन रही सुरक्षा दीवार को तिरछा कर दायरा बढाया और मस्जिद को शहीद किया। यदि सीधी दीवार निकाली जाती तो मस्जिद बच जाती। मंदिर और मस्जिद से किसी को क्या परेशानी हो सकती है।
- मुब्बशीर बावा (ट्रस्टी, मोहम्मदी मस्जिद)

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