- लाजपोर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी से ‘पत्रिका’ की विशेष बातचीत - राज्य में पहली बार आयोजित हुई लाजपोर जेल कैदियों की तीन दिवसीय चित्र प्रदर्शिनी
दिनेश एम.त्रिवेदी
सूरत. वैसे तो फोटो में नजर आर रही लाजपोर जेल के कैदियों पेंटिंग बिना शब्दों के ही अपनी कहानी बयां कर रही हैं। इन पेंटिंग में कहनी के साथ आम लोगों के लिए यह संदेश भी छिपा है कि क्षणिक आवेश में उठाया गया कदम आपकी ही नहीं आपके अपनों की जिंदगी तबाह कर सकता है।
इसलिए हमेशा स्वयं पर नियंत्रण रखे, कानून को कभी भी अपने हाथ में नहीं लें। राज्य में पहली बार अठवालाइन्स स्थित वनिया विश्राम हॉल में आयोजित हुई कैदियों की तीन दिवसीय चित्र प्रदर्शिनी आजीवन कारवास के कैदी जितेन्द्र मौर्या ने पत्रिका से विशेष बातचीत की।
हत्या के मामले में पिछले 17 वर्षो से लाजपोर जेल में बंद जितेन्द्र उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर के निवासी हैं। आजीविका के लिए वे सूरत में बतौर पेंटर काम करते थे। पारिवारिक कलेश में विवाद हुआ और उनसे हत्या हो गई, हालांकि कथिततौर पर उनका इरादा आत्मरक्षा का था।
दोषी पाए जाने पर उन्हें कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, तब से वह लाजपोर जेल में बंद हैं। जितेन्द्र ने कहा कि जेल में उन्हें हर वक्त गांव में रहने वाले बुुजुर्ग माता-पिता व छोटे भाइयों की चिंता सताती है। यह बात बहुत खलती है कि जरुरत के समय उनसे दूर हूं। चाह कर भी उनके लिए वो सब नहीं कर पा रहा, जो करना चाहता हूं। यह सिर्फ मेरी व्यथा नहीं हैं, जेल में मेरे जैसे और भी कई कैदी हैं। उन सभी कैदियों की भावनाओं के मैंने कैनवास पर व्यक्त करने का प्रयास किया है।
चित्र में नजर आ रहे कबूतर कैदी हैं। कोई कुछ समय बाद छूट जाता हैं तो किसी की जिंदगी कैद में ही खत्म हो जाती हैं। बुजुर्ग आदमी और औरत, घर और उड़ते कबूतर के जरिए कैदियों माता-पिता, उनके घर और आजादी की चाहत को दर्शाने का प्रयास किया है।
जितेन्द्र ने बगल में खड़े सुरक्षाकर्मियों की तरफ नजर घुमाने के बाद कहा कि जेल में सब ठीक है। पेटिंग कार्य की शुरुआत होने के बाद मुझे मानसिक तनाव कम करने में मदद मिलती है। इससे अपना खर्च निकालकर परिवार की भी कुछ मदद करता हूं।
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