सूरत. शीर्ष पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा फर्क पड़ रहा है। गुजरात का एजुकेशन मॉडल ऐसा है कि सूरत समेत राज्य के 15 जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी District Education Officer (डीईओ) DEO SURAT नहीं हैं। 19 जिलों में जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी (डीपीओ) DPO भी नहीं हैं। नवसारी और डांग के साथ ही कई जिलों में दोनों ही पद रिक्त पड़े हैं।
जिले शिक्षा DEO SURAT व्यवस्था के संचालन का जिम्मा District Education Officer डीइओ DEO SURAT और डीपीओ DPO का होता है। गुजरात के 33 जिलों में सूरत समेत 15 जिले ऐसे हैं, जहां पिछले लंबे समय से डीईओ की तैनाती के अभाव में इंचार्ज से काम लिया जा रहा है। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात के नवसारी, तापी, भरूच और डांग के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट, अरवल्ली, छोटा उदयपुर, दाहोद, द्वारिका, गीर सोमनाथ, जामनगर, जूनागढ़, महीसागर, मोरबी, पाटण और सुरेंद्रनगर में डीपीओ का कार्य भी इंचार्ज के भरोसे है। दक्षिण गुजरात के नवसारी और डांग समेत कई जिलों में तो डीईओ और डीपीओ दोनों ही पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर (टीपीओ) को इंचार्ज के रूप में उनकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इंचार्ज अधिकारियों के कारण प्रशासनिक कार्यों के संपादन में दिक्कत पेश आ रही है।
- कर्मचारियों के प्रमोशन भी अटके पड़े हैं :
गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड GSEB के कार्यालय में पांच में चार, सर्व शिक्षा अभियान के चार में चार, कमीशन ऑफ स्कूल के पांच में चार, जीसीईआरटी में पांच में तीन, उच्च शिक्षा कार्यालय में एक समेत श्रेणी 1 और 2 के कर्मचारियों की कमी के चलते परेशानी हो रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से कई वजहों से इन विभागों में 40 से अधिक श्रेणी 2 के कर्मचारियों के प्रमोशन भी अटके पड़े हैं।
- जल्द भरे जाएंगे रिक्त पद :
मामले को केबिनेट के समक्ष रखा था। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही प्रदेश में रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- प्रफुल्ल पानशेरिया, राज्य शिक्षा मंत्री, गुजरात