
डॉलर इफेक्ट : हीरों की मांग घटने से हीरा उद्योग संकट में
सूरत
डॉलर की बढ़ती कीमतों ने हीरा उद्योग की हालत खराब कर रखी है। छोटे और मध्यम हीरा उद्यमियों ने रफ हीरों की खरीद कम कर दी है और उत्पादन में कटौती कर रहे हैं।
हीरा उद्योग के सूत्रों के अनुसार सूरत के हीरा उद्यमी जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका और रशिया से रफ हीरे खरीदते हैं। डॉलर की बढ़ती कीमतों के कारण विदेश से आयातित रफ हीरे महंगे हो गए हैं। छोटे और मध्यम हीरा उद्यमी सीधे विदेश से रफ हीरे खरीदने के बजाय बड़े हीरा उद्यमियों से खरीदते हैं। इसलिए उन्हें और ज्यादा कीमत देनी पड़ रही है। एक ओर रफ हीरों की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है, दूसरी ओर हीरे की मांग कम होने के कारण कट और पॉलिश्ड हीरों की कीमत नहीं बढ़ी है। हीरा उद्यमियों को कम कीमत पर माल बेचना पड़ रहा है। कुछ उद्यमी मजबूरन उत्पादन खर्च पर ही माल बेच रहे हैं। कुछ उद्यमी मजबूरन उत्पादन खर्च पर ही माल बेच रहे हैं । बड़े हीरा उद्यमी स्टॉक कर रहे हैं। वह हीरों की कीमत बढऩे पर इन्हें बेचेंगे, लेकिन छोटे और मध्यम उद्यमियों के पास ज्यादा पूंजी नहीं होने के कारण उन्हें हीरा श्रमिकों का वेतन तथा अन्य खर्च निकालने के लिए हीरे बेचने पड़ रहे है। बिना लाभ व्यापार करने की अपेक्षा कई हीरा उद्यमियों ने उत्पादन कम कर दिया है तो कइयों ने कारखाने बंद कर दिए हैं।
उद्यमी परेशान
डॉलर की बढ़ती कीमतों के कारण हीरा उद्यमियों की हालत पतली हो रही है। छोटे और मध्यम उद्यमियों ने रफ हीरों की खरीद पर ब्रेक लगा दिया है। कई हीरा उद्यमियों ने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है।
महेन्द्र नावडिय़ा, हीरा उद्यमी
सुधरेगा बाजार
फिलहाल बाजार में रफ हीरों की कीमत ज्यादा और पॉलिश्ड हीरों की कीमत स्थिर होने के कारण उद्यमी परेशान हैं, लेकिन परिस्थिति जल्द सुधरने की उम्मीद है।
आकाश सोरठिया, हीरा उद्यमी
Published on:
03 Oct 2018 08:42 pm
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