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एम्ब्रॉयडरी उद्यमियों के पास जॉबवर्क का अभाव, हालत कमजोर

25 प्रतिशत यूनिटों में सप्ताह में दो अवकाश की परिस्थिति
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सूरत

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Pradeep Devmani Mishra

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Updated: 23 Sep 2018, 9:22 PM IST

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एम्ब्रॉयडरी उद्यमियों के पास जॉबवर्क का अभाव, हालत कमजोर

सूरत

जीएसटी के बाद से अभी तक एम्बॉयडरी यूनिट संचालकों की हालत सुधर नहीं पाई है। पिछले दिनों उन्हें रक्षाबंधन और ईद में निराशा मिलने के बाद दिवाली में अच्छे जॉबवर्क मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक उनकी आशा के अनुरुप ऑर्डर नहीं मिलने से वह चिंतित हैं। पर्याप्त ऑर्डर नहीं मिलने के कारण 25 प्रतिशत यूनिट में एक शिफ्ट में काम या तो कारखाना बंद करने की नौबत आई है।
कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि जीएसटी के बाद से लगातार कपड़ा उद्योग की हालत खराब होते जा रही है। एम्ब्रॉयडरी उद्यमियों के पास पर्याप्त जॉबवर्क नहीं होने के कारण उन्हें श्रमिकों का वेतन और किराया तथा मशीन का हप्ता चुकाने के लिए भी सोचना पड़ रहा है। बड़े एम्ब्रॉयडरी यूनिट संचालक तो बैंक अथवा अन्य स्थानों से ऋण लेकर टिके हैं लेकिन छोटे उद्यमियों के लिए बड़ी मुसीबत हो गई है। एम्ब्रॉयडरी संचालकों को त्यौहारों के दिनों में बड़े पैमाने पर जॉबवर्क मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ बड़े उद्यमियों को अच्छे ऑर्डर मिले हैं लेकिन 80 प्रतिशत एम्ब्रॉयडरी उद्यमियों को औसत से कम ऑर्डर मिला है। ऐसे में 25 प्रतिशत एम्ब्रॉयडरी यूनिट संचालक काम का समय कम करने या सप्ताह में दो दिन अवकाश की सोच रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एम्ब्रॉयडरी यूनिट संचालक ऐसे दौर में पहले से ही परेशान हैं और दूसरी ओर कुछ श्रमिक रविवार को वेतन के साथ छुट्टी की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर पिछले दिनों कई क्षेत्रों में एम्ब्रॉयडरी कारखानों में तोडफ़ोड़ और हड़ताल भी हुई थी। इसे लेकर एम्ब्रॉयडरी संचालक चिंतित हैं।
विदाई पर जैसे आसमान भी रो पड़ा

गणेश महोत्सव की अंतिम रात शनिवार को शहर में बिजली की कडक़ड़ाहट के झमाझम बारिश के बाद रविवार दोपहर हल्की बारिश हुई। शनिवार को दिनभर बादले छाए रहने के बाद रात करीब ग्यारह बजे आंधी के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। गणेश उत्सव का आखिरी दिन होने के कारण पंडालों में लोग ढोल-नगाड़ों के साथ नाच रहे थे। तेज बारिश से भक्तों का जोश दुगना हो गया। बारिश के कारण शहर की सडक़ों और कई निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। इससे परिवार के साथ गणपति देखने निकले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विसर्जन यात्रा के दौरान बारिश के दौरान लोगों ने प्रतिमाओं को प्लास्टिक से ढक दिया।

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