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कृत्रिम तालाबों और समुद्र की राह श्रीजी गए निजधाम

80 हजार से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन, ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ की गुहार के बीच गणपति बप्पा को भावभीनी विदाई, तालाबों में विसर्जित प्रतिमाएं भी बाद में समुद्र ले जाई गईं, सडक़ों पर उमड़ा भक्तों का सैलाब
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सूरत

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Vineet Sharma

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Updated: 23 Sep 2018, 7:27 PM IST

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कृत्रिम तालाबों और समुद्र की राह श्रीजी गए निजधाम

सूरत. सूरत में गणेश महोत्सव के इतिहास में पहली बार बप्पा तापी नदी की जगह कृत्रिम तालाबों और समुद्र के रास्ते निजधाम रवाना हुए। गणेश चतुर्थी से भक्तों के मन-प्राण और घरों-सोसायटियों में विराजित बप्पा को रविवार को अनंत चतुर्दशी पर भावभीनी विदाई दी गई। भक्तों ने बोझिल मन से बप्पा को विदा करते हुए उन्हें अगले बरस जल्दी आने का न्योता दिया। शहर की सडक़ों पर सुबह से रात तक भक्तों की भीड़ नजर आई।

गणेश महोत्सव के करीब अस्सी साल के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब तापी नदी में बप्पा का विसर्जन नहीं किया गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद पुलिस और मनपा प्रशासन ने गणपति प्रतिमाओं के तापी नदी में विसर्जन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। पांच फीट तक की प्रतिमाओं को कृत्रिम तालाबों और उससे बड़ी प्रतिमाओं को समुद्र में विसर्जित करने की व्यवस्था की गई। प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए मनपा प्रशासन ने पिछले साल की अपेक्षा तालाबों की संख्या दुगनी करते हुए २२ कृत्रिम तालाब तैयार कराए थे।

अनंत चतुर्दशी पर्व पर रविवार को घरों, गली-मोहल्लों और मंडपों-सोसायटियों में विराजे गणपति निजधाम रवाना हुए। बप्पा को विदा करने के लिए जुलूस की शक्ल में भक्तों का हुजूम सडक़ों पर उतर आया। बप्पा को विदाई देने के लिए लोगों ने सुबह से ही तालाबों और समुद्र का रुख किया। कृत्रिम तालाबों पर सुबह आठ बजे से विसर्जन शुरू हो गया था। शुरुआत में घरों में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान हुई बारिश भक्तों के जोश को कम नहीं कर पाई। बारिश थमते ही मंडपों और सोसायटियों में स्थापित प्रतिमाओं को लेकर भक्त बाहर निकले।

दोपहर बाद बड़ी प्रतिमाओं ने डूमस समुद्र किनारे का रुख किया। कृत्रिम तालाबों में दोपहर तीन बजे तक सात-सात हजार प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका था। पांच फीट से बड़ी प्रतिमाओं के कृत्रिम तालाबों में विसर्जन पर रोक के कारण बड़ी प्रतिमाएं समुद्र में विसर्जित की गईं। तालाबों और समुद्र में विसर्जन की प्रक्रिया आधी रात तक चली।

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