
सातवें दिन गणपति को भावभीनी विदाई
सिलवासा. सिलवासा शहर में गणपति महोत्सव की धूम मची हुई है। पंडालों और घरों में पूजा-अर्चना का दौर जारी है। बुधवार को गणपति महोत्सव के सातवें दिन गौरी गणेश की सैकड़ों प्रतिमाओं को भावभीनी विदाई दी गई। अथाल दमणगंगा घाट पर विसर्जन के लिए दोपहर होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। शहर के बाविसा फलिया, पिपरिया घाट पर श्रद्धालुओं ने विघ्न विनायक को विदाई दी। अथाल घाट पर विसर्जन के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व प्रबंधन की व्यवस्था की। मूर्ति विसर्जन के लिए फायर ब्रिगेड के जवान भी मौके पर तैनात रहे। शहर के विभिन्न इलाकों से गाजे-बाजे के साथ बप्पा की 100 से अधिक सवारियां निकली। कहीं बप्पा देवाधिदेव के रूप मे नजर आए, कहीं बाल गणेश। विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव में अंबीर-गुलाल खेलते हुए बप्पा के जमकर जयकारे लगाए। दादरा, रखोली, नरोली, किलवणी, रांधा, खानवेल, रूदाना में भी सातवें दिन बड़ी संख्या में सृष्टि विनायक को विसर्जन यात्राएं निकली। पिपरियां गणेश मंडलम, श्री सिद्धि विनायक मित्र मंडल के गणेशोत्सव में उद्योगों से श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं।
ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं स्थापित
इस बार सोसायटियों में गौरी-गणेश की ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं स्थापति की गई हैं। आमली तिरुपति रेजिडेंसी में 11 दिन का गणेशोत्सव रखा है। महोत्सव के छठे रोज सोसायटी की महिलाओं व पुुरुषों ने एक साथ भगवान की पूजा-अर्चना की और भजन गाए। यहां रोजाना शाम होते ही पंडाल में श्रीजी के भजन शुरू हो जाते हैं। आमली फव्वारा के पास हेरीटेज में स्थापित गणेश मंडप में सोसायटी के श्रद्धालुओं ने मंगलवार को सत्यानारायण कथा सुनी। गणेश मंडलम् में भक्तों की सबसे अधिक भीड़ लग रही है। इसमें दर्शनों के लिए पिपरिया, अंबेडकर नगर, लवाछा, आमली, सिलवासा से श्रद्धालु आ रहे हैं।
पंडालों में रोज हो रही पूजा-अर्चना
पंडालों में एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात, सिंदूर शोभनं रक्तं सौभाग्य सुखवर्धनम्, नैवेद्यं गृह्मतां देव भक्तिं मे ह्मचलां कुरू आदि अनेक मंत्रों से नित्य पूजा होती है। रिद्धि सिद्ध विनायक मंडल में स्कूली बच्चों ने बप्पा के दर्शन किए। यहां रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम चालू हो गए हैं। इस बार पंडाल में 9 फीट की प्रतिमा स्थापित की गई है। रांधा शिव शक्ति मंडल में अनंत चतुर्दशी तक गणाध्यक्ष की पूजा रखी है। रखोली, खानवेल, दपाड़ा, खड़ोली, आंबोली में भी अधिकांश पड़ालों से प्रतिमाओं का विसर्जन हो गया है।
दमण के लोगों ने लंदन में मनाया गणपति उत्सव
दमण. दमण के अनेक लोग लंदन के लेस्टर शहर में बसे हैं। वहां भी उन्होंने अपनी परम्पराओं को बनाए रखा है। दमण राणा समाज के भी सैकड़ों परिवार वहां बसे हैं। राणा समाज और गुजराती युवाओं ने लेस्टर में पांच दिनों के गणपति विराजमान किए हैं। लंदन में 7 फीट के गणपति की प्रतिमा बनाई गई। 5वें दिन गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
Published on:
19 Sept 2018 08:03 pm

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