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Honeytrap : हनीट्रैप गैंग का मास्टरमाइंड हेड कांस्टेबल जयेश अहीर गिरफ्तार

- अडाजण के कपड़ा कारोबारी को फंसा कर मांगे थे पांच लाख रुपए - पांच महीनों से था फरार, पूर्व में दो साथी पकड़े गए थे  

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Honeytrap : हनीट्रैप गैंग का मास्टरमाइंड हेड कांस्टेबल जयेश अहीर गिरफ्तार

Honeytrap : हनीट्रैप गैंग का मास्टरमाइंड हेड कांस्टेबल जयेश अहीर गिरफ्तार

सूरत. उमरा पुलिस ने अडाजण पाटिया क्षेत्र के कपड़ा कारोबारी को हनीट्रैप में फंसा कर पांच लाख रुपए ऐंठने का प्रयास करने के मामले में फरार चल रहे पुलिस मुख्यालय के हेड कांस्टेबल जयेश अहीर को उमरा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक सिटीलाइट एंजल रेजिडेंसी निवासी हेड कांस्टेबल जयेश अहीर अपने साथियों जिग्नेश जियाविया, देवेन्द्र जोशी उर्फ देवा और एक महिला के साथ मिलकर हनीट्रैप का रैकेट चला रहा था।

उन्होंने गत अप्रेल माह में अडाजण पाटिया क्षेत्र के कपड़ा कारोबारी को अपने जाल में फंसाया था। एक महिला के जरिए पीडि़त को फोन करवाया था। महिला ने पीडि़त से कहा था कि उसे हैंडमेड साडिय़ां खरीदनी हैं। साडिय़ों के सौदे के बारे में बात करने के लिए उसने पीडि़त को घोड़दौड़ रोड स्थित पूजा अपार्टमेंट में मिलने के लिए कहा था। दोपहर में पीडि़त बताई जगह पहुंचा तो वहां मौजूद महिला ने उसे कमरे में बिठाया। एक गिलास पानी दिया और फिर उसकी बगल में बैठ गई। तभी खाकी वर्दी पहने तीन जने फ्लैट में घुस आए।

उन्होंने पुलिस की धौंस जमाते हुए पीडि़त को दो-तीन थप्पड़ मारे फिर देहव्यापार का आरोप लगाकर पुलिस केस करने की धमकी दी। उसके बाद उन्होंने मामले को रफादफा करने के एवज में पांच लाख रुपए की मांग की। बातचीत के बाद दो लाख रुपए में पीडि़त को छोडऩे के लिए तैयार हो गए और पीडि़त से दस हजार रुपए ले लिए। पीडि़त ने अगले दिन उन्हें रुपए लेने के लिए अपने मित्र के मेडिकल स्टोर पर आने के लिए कहा।

वे रुपए लेने के लिए मेडिकल स्टोर पहुंचे लेकिन स्टोर बंद मिला। उसके बाद वे लगातार पीडि़त को फोन पर धमकिया दे रहे थे। इस संबंध में पीडि़त से शिकायत मिलने पर उमरा पुलिस ने जिग्नेश व देवेन्द्र को गिरफ्तार किया था, लेकिन जयेश फरार हो गया था। उसके बारे में मुखबिर से सूचना मिलने पर उमरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

उमरा थाने के लेटर बॉक्स से हुआ था खुलासा

उल्लेखनीय है कि गत अप्रेल माह में उमरा पुलिस ने पुलिस थाने के अलावा विभिन्न स्थानों पर आम लोगों के लिए लेटर बॉक्स रखे थे। इसका मकसद यह था कि जो लोग सीधे थाने आकर शिकायत करने से कतराते हैं वे लेटर बॉक्स में अपनी शिकायत और सुझाव डाल कर पुलिस तक पहुंचा सकें। पीडि़त ने ऐसे ही एक लेटर बॉक्स में अपनी शिकायत लिख कर डाली थी। शिकायत मिलने पर उमरा पुलिस ने पीडि़त से संपर्क किया और प्राथमिकी दर्ज करवाई की।
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