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हिन्दी दिवस विशेष : न हिन्दी के विद्यार्थी बढ़े, न अध्यापक

सरकार की उदासीनता से स्कूल-कॉलेजों में हिन्दी की उपेक्षा  
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सूरत

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Divyesh Kumar Sondarva

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Updated: 14 Sep 2018, 7:43 PM IST

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हिन्दी दिवस विशेष : न हिन्दी के विद्यार्थी बढ़े, न अध्यापक

सूरत.

राज्य सरकार की उदासीनता के कारण राज्यभर में हिन्दी उपेक्षित है। गौण विषय के तौर पर हिन्दी की गिनती से इसके प्रति विद्यार्थियों की रुचि कम होती जा रही है। दूसरी तरफ स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए हिन्दी के प्राध्यापक नहीं मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वर्ष 2015 में वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग शुरू करने की मंजूरी दी थी, लेकिन तीन साल बाद भी विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग की नींव नहीं रखी गई है।
हिन्दी दिवस पर गुजरात में औपचारिक आयोजनों से ज्यादा कुछ नहीं होता। सभी विभागों में हिन्दी पखवाड़ा मनाने और उसकी रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया जाता है। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में भी हिन्दी दिवस पर हिन्दी पखवाड़ा मनाने का दिखावा किया जाता है, हिन्दी के प्रति गंभीरता, सजगता और रुचि नजर नहीं आती। हिन्दी माध्यम और हिन्दी विषय में घटती जा रही विद्यार्थियों की संख्या यह साबित करने के लिए काफी है कि गुजरात में हिन्दी की क्या दशा है। सूरत में लाखों हिन्दी भाषी बसते हैं। हिन्दी माध्यम और हिन्दी विषय में प्राध्यापक तथा अन्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण इसके विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। हिन्दी माध्यम में सामान्य वर्ग और विज्ञान वर्ग के महाविद्यालय तथा हिन्दी की किताबें नहीं होने के कारण 12वीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को अंग्रेजी या गुजराती माध्यम के महाविद्यालयों में प्रवेश लेना पड़ता है। हिन्दी में बीए करने वाले विद्यार्थियों को भी काफी दिक्कतों का सामान करना पड़ रहा है। हिन्दी में पढ़ाने वाले प्राध्यापक नहीं मिल रहे हैं। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग शुरू हो जाता तो यह समस्या एक हद तक कम हो सकती थी। हिन्दी विभाग से यहां हिन्दी में पीएचडी और अन्य शोध करने में आसानी होगी। दक्षिण गुजरात समेत गुजरात को हिन्दी के विशेषज्ञ और प्राध्यापक मिल सकते हैं। राजस्थान पत्रिका ने वर्ष 2014 में हिन्दी विभाग के लिए अभियान शुरू किया था। अभियान का असर यह हुआ कि मार्च 2015 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के लिए मंजूरी दे दी, लेकिन तीन साल बाद भी हिन्दी विभाग शुरू नहीं हो पाया है, क्योंकि राज्य सरकार इसमें रुचि नहीं ले रही है। हिन्दी विभाग के प्राध्यापकों के वेतन के मामले को लेकर अभी तक फाइल राज्य सरकार के पास अटकी पड़ी है।

पीजी सेंटर्स के हाल भी खराब
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय संबद्ध 11 महाविद्यालयों में हिन्दी के पीजी सेंटर चल रहे हैं। राज्य का बड़ा विश्वविद्यालय होने के बावजूद इसके पास एक भी पीजी महाविद्यालय नहीं है। एक हिन्दी पीजी सेंटर में कम से कम 20 प्राध्यापकों की आवश्यकता है, लेकिन एक भी हिन्दी पीजी सेंटर में 20 प्राध्यापक नहीं हैं। इनमें 5-6 प्राध्यापकों से ही काम चलाया जा रहा है। एक प्राध्यापक को दो से अधिक पीजी सेंटर में पढ़ाने जाना पड़ रहा है। हिन्दी प्राध्यापकों की कमी के कारण हिन्दी में पीजी करने वाले भी कम होते जा रहे हैं।

गुजरात बोर्ड में हिन्दी माध्यम के विद्यार्थी
वर्ष 10वीं 12वीं विज्ञान 12वीं सामान्य
2016 20,960 1,839 10,614
2017 18,342 2,070 12,999
2018 18,665 1,941 11,347

हिन्दी विषय चुनने वाले विद्यार्थी
वर्ष 10वीं 12वीं विज्ञान 12वीं सामान्य
2016 2,26,020 292 91,387
2017 2,16,849 209 86,454
2018 2,62,216 286 1,04,554

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