
झूलो-झूलो रे थे तो त्रिशला रा जाया...
सूरत. पर्युषण पर्व के अन्तर्गत जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में भगवान महावीर जन्म वाचन के आयोजन सोमवार को किए गए। इस दौरान लालबंगला, अठवालाइंस, गोपीपुरा, भटार, घोडदौडऱोड, कतारगांव, नानपुरा, अमरोली, टीकमनगर, वराछा आदि क्षेत्र में विभिन्न गुरु भगवंतों के सान्निध्य में कल्पसूत्र ग्रंथ द्वारा भगवान महावीर का जन्म वाचन किया गया। इसमें सुबह तो कहीं शाम को उपाश्रयों में हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने वाचन श्रवण किया। इस बीच भजनों की प्रस्तुति भी दी गई। इस मौके पर झूलो-झूलों रे थे तो त्रिशला रा जाया..., बाजे कुंडलपुर में बधाई के त्रिभुवन के नाथ जन्मे...एवं त्रिशलानंदन वीर की जय बोलो महावीर की...आदि भजन व जयकारे गूंजते रहे। इस दौरान खुशी से श्रद्धालु झूमते रहे। बाद में जैसे ही भगवान महावीर के जन्म की घोषणा की गई तो श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को मिठाई बांटी व बधाई दी। इसके बाद भगवान का पारणा लाभार्थी परिवार अपने-अपने घर ले गए और वहां रात्रि जागरण के आयोजन किए गए। भगवान महावीर के जन्म वाचन के मौके पर शहरभर के जिनालयों में आंगी व रोशनी की गई।
उधर, टीकमनगर जैन संघ उपाश्रय में सोमवार को पन्यास पद्मदर्शन विजय महाराज के सान्निध्य में भगवान महावीर का जन्म वाचन किया गया। इस अवसर पर निर्धनों को दान, गौशाला में गायों को गुड़-हरी घास खिलाई गई व शाम को महापूजन का आयोजन किया गया। रांदेर रोड श्रीमाली जैन उपाश्रय में ज्ञानदर्शनविजय महाराज के सान्निध्य में भी सोमवार को जन्मवाचन किया गया।
मन की शांति का उपाय वाणी संयम
सिटीलाइट के तेरापंथ भवन में सोमवार सुबह साध्वी सरस्वती के सान्निध्य में वाणी संयम दिवस मनाया गया। साध्वी ने बताया कि मनुष्य को चार बातों पर ध्यान देना चाहिए। इसमें जराधर्मी, रोगधर्मी, वियोगधर्मी व शरणधर्मी शामिल है। मनुष्य को इन चारों का भली-भांति पता होना चाहिए। मौन से विचारों का अल्पीकरण होता है और मौन मन की शांति का प्रभावक उपाय है। मौन से आत्मा की आवाज सुनाई देती है। इस दौरान साध्वी संवेगप्रभा ने भी संबोधन किया।
वहीं, वाणी संयम दिवस के आयोजन परवत पाटिया के तेरापंथ भवन में साध्वी शिवमाला व कामरेज के तेरापंथ भवन में मुनि संजयकुमार के सान्निध्य में आयोजित किए गए।
Published on:
10 Sep 2018, 9:08 PM IST
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