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लारी-गल्ला वालों ने दिखाई ताकत, मांगा जीविकोपार्जन का अधिकार

अतिक्रमण हटाने के नाम पर लारी-गल्ला संचालकों के खिलाफ चल रहे मनपा प्रशासन के अभियान के खिलाफ लारी-गल्ले वालों ने मंगलवार...

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Lari-gala people have the power to earn, the right to earn livelihood

Lari-gala people have the power to earn, the right to earn livelihood

सूरत।अतिक्रमण हटाने के नाम पर लारी-गल्ला संचालकों के खिलाफ चल रहे मनपा प्रशासन के अभियान के खिलाफ लारी-गल्ले वालों ने मंगलवार को रैली निकालकर अपनी ताकत दिखाई। हजारों की तादाद में रैली में शामिल हुए लारी-गल्ला संचालकों ने स्थानीय प्रशासन पर उनके हितों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाते हुए स्ट्रीट वेंडर एक्ट २०१४ पर अमल की मांग की। मनपा आयुक्त एम. थेन्नारसन से मिलकर उन्होंने ज्ञापन भी सौंपा।

शहर में ट्रैफिक के बढ़ते दबाव से निपटने के लिए मनपा प्रशासन ने अलग-अलग करीब १२० मुख्य रास्तों को अतिक्रमण रहित मार्ग घोषित किया है। यानी इन रास्तों पर लारी-गल्लों के लिए कोई जगह नहीं है। अतिक्रमण रहित मार्गों से लारी-गल्ले हटाने के नाम पर मनपा प्रशासन आए दिन अभियान चलाता है। लारी-गल्ला संचालकों का आरोप है कि मनपाकर्मी लारी-गल्ला तो हटाते ही हैं, लारी पर बेचने के लिए रखा गया सामान भी जब्त कर लेते हैं और चालान काट दिया जाता है।


उनके मुताबिक लारी पर रखा सामान जब्त करना कानूनी और सामाजिक न्याय के भी खिलाफ है। एक्ट में प्रावधान है कि लारी जब्त करते समय उस पर रखा सामान लारी संचालक को देना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई करते समय मनपा प्रशासन इस प्रावधान का खुला उल्लंघन करता है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के निर्देश के बाद पिछले कुछ दिनों से मनपा प्रशासन ने लारी-गल्ले हटाने की सक्रियता बढ़ाई है।

इस मामले को लेकर नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया से संबद्ध सूरत स्ट्रीट वेंडर्स ग्रुप के प्रेसिडेंट शब्बीर चाहवाला के नेतृत्व में मंगलवार शाम करीब चार बजे शहर के लारी-गल्ला संचालक चौक की गांधी प्रतिमा के समक्ष जमा हुए। हजारों की तादाद में लोगों ने मनपा मुख्यालय तक मार्च निकाला। मनपा मुख्यालय पहुंचकर उन्होंने प्रदर्शन किया और स्ट्रीट वेंडर एक्ट को लागू करने में बरती गई लापरवाही पर नाराजगी जताई।

मनपा आयुक्त एम थेन्नारसन को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन स्ट्रीट वेंडर एक्ट २०१४ और गुजरात गजट २० दिसंबर, २०१६ को लागू करने मेें कोताही बरत रहा है। जीविकोपार्जन संविधान में प्रदत्त अधिकार है, जिसे मनपा प्रशासन छीन रहा है। सुप्रीम कोर्ट के ओदश के बावजूद लारी-गल्ला संचालकों का उत्पीडऩ हो रहा है और दो गुना दंड वसूला जा रहा है। गरीबों की रोजी रोटी पर चोट बताते हुए कहा गया कि लारी से सामान भी जब्त किया जा रहा है।

गलत आंकड़ों का आरोप

वर्ष २०१४ में केंद्र ने स्ट्रीट वेंडर प्रोटेक्शन ऑफ लाइवहुड एंड रेग्युलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग एक्ट २०१४ पारित किया था। इसके तहत स्थानीय प्रशासन को टाउन वेंडिंग कमेटी गठित करनी थी, जिसमें चुनाव प्रक्रिया अपनाई जानी थी।

सूरत में ऐसा नहीं हुआ। शहर की आबादी ६० लाख है और लारी-गल्ला लोगों की जरूरत है। राज्य की जिस एजेंसी ने पूर्व में सर्वे किया, उसके आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए लारी-गल्ला संचालकों ने कहा कि ६० लाख की आबादी वाले शहर में १८,३४६ लारी-गल्ले होने का आंकड़ा हास्यास्पद है। सरकारी मशीनरी पर सही आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने दोबारा सर्वे की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर में करीब डेढ़ लाख लारी-गल्ला संचालक हैं, जिन्हें लाइसेंस दिया जाना चाहिए।

मनपा की टीमों ने कतारगाम और लिंबायत में हटाया अतिक्रमण


मनपा की कतारगाम और लिंबायत जोन टीमों ने मंगलवार को अतिक्रमण हटाया और अवैध निर्माण ढहाने की कार्रवाई की। मनपा टीम ने कतारगाम में मेन रोड पर और वेड रोड में सिंगणपोर चार रास्ता पहुंचकर वहां खड़ी लारियां जब्त कर लीं। इस रास्ते पर अवैध रूप से सडक़ किनारे बने फुटपाथ तोड़ दिए गए। लिंबायत जोन टीम ने डिंडोली मेन रोड पर फुटपाथ तोड़े और लारियां जब्त कीं।

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