
surat
सूरत। महात्मा गांधी के पोते और नासा के पूर्व वैज्ञानिक कनु रामदास गांधी का सोमवार को निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। कनु गांधी पिछले कुछ सप्ताह से एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था और ब्रेन हेमरेज भी हुआ था जिसकी वजह से उन्हें पक्षाघात हो गया था। वह कोमा में चले गए थे जहां से वह कभी लौट नहीं पाएं। उनके परिवार में उनकी पत्नी शिवलक्ष्मी हैं। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा।
कनु गांधी अमरीका में चार दशक तक रहने के बाद स्वदेश लौटे। उन्होंने वहां 25 साल तक नासा के वैज्ञानिक के तौर पर काम किया। साठ के दशक में भारत में अमरीका के राजदूत जॉन केन्नथ गेलब्रेथ ने गांधी की एमआईटी में पढऩे में मदद की थी। बाद में उन्होंने नासा के वैज्ञानिक के तौर पर और अमरीकी रक्षा विभाग में काम किया।
गांधी के पुराने दोस्त धीमंत बाधिया ने बताया कि भारत आने के बाद उनके पास यहां रहने के लिये जगह नहीं थी इसलिए वह यहां एक जगह से दूसरे जगह घूमते रहे। उन्होंने यहां कई आश्रमों में समय गुजारा और अंत में वे लगातार छह माह नई दिल्ली के गुरु विश्राम वृद्ध आश्रम में रहे। उस दौरान एक केंद्रीय मंत्री ने गांधी से संपर्क किया और उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत कराई, जिन्होंने उन्हें मदद का आश्वासन भी दिया।
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
