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breast milk jewellery : रिश्ते की खूबसूरती के लिए अपना दूध ज्वेलरी में सहेज रही माताएं

breast milk jewellery : ब्रेस्ट मिल्क ज्वेलरी फैशन का नया ट्रेंड, लॉकेट या अंगूठी बन दमक रहा ब्रेस्ट मिल्क, पुणे और मुंबई के बाद सूरत तक पहुंच गई पश्चिम की ये अनोखी पहल

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सूरत

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Vineet Sharma

Nov 02, 2022

breast milk jewellery : रिश्ते की खूबसूरती के लिए अपना दूध ज्वेलरी में सहेज रही माताएं

breast milk jewellery

विनीत शर्मा

सूरत. दुनियाभर में ज्वेलरी ट्रेंड्स बाजार में आते और बदलते रहते हैं। इन दिनों मां के दूध से तैयार हो रही ज्वेलरी ट्रेंड कर रही है। साल 2013 में शुरू हुए पश्चिम के इस प्रयोग की हवा पुणे, मुंबई और चेन्नई के बाद अब सूरत तक पहुंच गई है। ब्रेस्ट मिल्क से ज्वेलरी बनाकर बच्चे के साथ अपने खूबसूरत रिश्ते को सहेजने का तरीका चलन में आया है। आज के दौर की माएं अपनी ब्रेस्टफीडिंग जर्नी को प्रिजर्व कर रखने के लिए जूलरी में सहेज रही हैं। हालांकि ब्रेस्ट मिल्क से बने गहनों को लोगों की आलोचना का शिकार भी होना पड़ रहा है। इसके समर्थन में लोगों का तर्क है कि मां के दूध को हमेशा के लिए प्रिजर्व नहीं किया जा सकता। लंबे अंतराल के बाद इसके साइड इफेक्ट देखने को मिल सकते हैं।

हर आर्टिस्ट का है अलग है तरीका

ब्रेस्ट मिल्क ज्वेलरी बनाने का तरीका हर आर्टिस्ट का अलग होता है। आमतौर पर दूध के सैंपल में प्रिजर्वेटिव मिलाया जाता है, जिससे वह लंबे समय तक खराब ना हो सके। मिल्क प्रिजर्व करने के बाद उसे फ्रीज किया जाता है। दूध के तरल से ठोस में बदलने के बाद उसे मोल्ड किया जाता है। ज्वैलरी की डिजाइन के मुताबिक पांच से 30 मिली दूध की जरूरत होती है। कई कारीगर इसमें कॉर्न स्टार्च से लेकर मेटल जैसे रोज गोल्ड, सिल्वर, गोल्ड आदि का इस्तेमाल भी करते हैं।

सूरत तक पहुंची मुहिम

साल 2013 में पश्चिम से शुरू हुई ब्रेस्ट मिल्क ज्वैलरी देश के दूसरे शहरों से होते हुए सूरत तक पहुंच गई है। पेशे से डेंटिस्ट डॉ. अदिति दूसरे कई प्रयोगों के साथ मां के दूध को गहनों में सुरक्षित रखने का काम भी कर रही हैं। गहनों को बनाने के लिए ब्रेस्ट मिल्क को पहले ठोस में बदलती हैं और फिर आभूषण डिजाइन करती हैं। इस प्रक्रिया में करीब 15 दिन का समय लगता है। मां के दूध से ज्वेलरी ही नहीं, अदिति बच्चे के बालों और जन्म के दौरान बचाए गए अम्बिलिकल कॉर्ड का इस्तेमाल कर सोने-चांदी के कंगन और पेंडेंट व अन्य आभूषण डिजाइन करती हैं।

शोध की प्रक्रिया जारी

ब्रेस्ट मिल्क ज्लैवरी से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, इस क्षेत्र में निरंतर शोध हो रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लॉकेट या अंगूठी में सहेजा गया ब्रेस्ट मिल्क लंबे समय तक अपना रंग बरकरार रख सके। ब्रेस्ट मिल्क से हार, झुमके, चाम्र्स और अंगूठियां बन रही हैं। हर ज्वलैरी खास हो इसके लिए बच्चे के नाम के साथ या फिर किसी रत्न के साथ भी इसे तैयार किया जा रहा है।

प्रेरणा देने वाला फैशन ट्रेंड

मां के अमृत समान दूध से बनी ज्वेलरी न केवल तन की खूबसूरती बढ़ाएगी, बल्कि मन की खूबसूरती भी बढ़ाएगी। ज्वैलरी याद दिलाती रहेगी कि ऐसे हजारों बच्चे हैं जिन्हें मजबूरीवश मां का दूध जन्म के समय पोषण के लिए नहीं मिल सका है। इसलिए अधिक से अधिक माताओं को अपना अमृत दुग्धदान करना चाहिए इसके लिए स्वीमेर अस्पताल में मिल्क बैंक बना हुआ है।
कुंज पंसारी, मिल्क बैंक के चेयरमैन, रोटरी क्लब सीफेस, सूरत