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SURAT VIDEO NEWS : विधवा की 13 वर्षीय पुत्री के सवाल ने रांदेर पुलिस को झकझोरा

- पुलिस की कोशिश से विधवा के हताश चेहरे पर छलकें खुशी के आंसू- पति की मौत के बाद किराएदार ने मकान पर कर लिया था कब्जा- किराएदार को समझा कर विधवा को मकान का कब्जा दिलवाया

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SURAT VIDEO NEWS : विधवा की 13 वर्षीय पुत्री के सवाल ने रांदेर पुलिस को झकझोरा

SURAT VIDEO NEWS : विधवा की 13 वर्षीय पुत्री के सवाल ने रांदेर पुलिस को झकझोरा

दिनेश एम.त्रिवेदी

सूरत.मकर संक्रांति बंदोबस्त की थकान उतारे बिना रांदेर थाने के पुलिसकर्मी अपनी दैनिक गतिविधियों लगे थे, उसी समय एक विधवा मनीषा पटेल (40) थाने पहुंची। हताशा और मदद की उम्मीद के मिले-जुले भाव उसके चेहरे पर थे।

उसने रोते हुए कहा कि किराएदार ने उसके मकान पर कब्जा कर लिया है। पति के देहांत के बाद इस मकान अलावा, उसके पास कोई जमा पूंजी नहीं है और एक बच्ची की जिम्मेदारी भी है।

करीब एक करोड़ रुपए के इस पर ही उसकी पुत्री का भविष्य टिका है। उस समय अपनी चैम्बर में बैठे उप निरीक्षक एच.एन.परमार को मामला दीवानी लग रहा था। उन्हें इसमें पुलिस की कोई भूमिका नजर नहीं आ रही थी। फिर भी संतुष्टि व पीडि़ता के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के लिए उन्होंने मनीषा को चैम्बर में बुलाकर उसकी बात सुनी।

मनीषा ने बताया कि उसके पिता ने राजविहार सोसायटी में उसके लिए मकान खरीदा था। जिसे उसके पति ने 2015 में अपने परिचित मित्र को आठ हजार रुपए मासिक किराए पर दिया था। इस बीच 2020 में उसके पति का देहांत हो गया।

उसके बाद से पति के मित्र ने मकान का कोई किराया नहीं दिया। मकान खाली भी नहीं कर रहा। किराएदार कहता है कि उसने उसके पति को छह लाख रुपए उधार दिए थे।

वहीं अन्य लोगों से यह कहता रहता है कि मकान उसीका है, वह मकान कभी नहीं छोड़ेगा। परमार मनीषा की बात सुन ही रहे थे, तभी बाहर बैठी मनीषा की तेरह वर्षीय पुत्री उनकी चैम्बर में आई। वह उनकी बातें सुन रही थी।

उसने अपनी मासूमियत के साथ अधिकारपूर्ण लहजे में सवाल किया कि क्या हमें अपना मकान मिलेगा या फिर मेरी मम्मी ऐसे ही रोती रहेगी? पुलिस तो सब कुछ कर सकती है, हमें मकान मिलेगा या नहीं?

इस सवाल पर परमार सोच में पड़ गए। वे सोच रहे थे कि कैसे मदद कर सकते हैं? उन्होंने मनीषा व उसकी पुत्री को ऐसे ही लौटाने के बदले कोशिश करने का मन बनाया।
उन्होंने मनीषा की लिखित शिकायत ली और उच्च अधिकारियों से इस बारे में बात की। उसके बाद किराएदार को बुला कर उसका पक्ष जाना।

किराएदार की काउन्सलिंग कर उसे समझाने की कोशिश जारी रखी। आखिरकार उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह मकान लौटाने के लिए तैयार हो गया। उसने मकान खाली कर शुक्रवार को उसे मनीषा को सौंप दिया। मकान का कब्जा मिलने पर विधवा मनीषा की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए।

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