
पानी की खोज के साथ ही शहर नियोजन में भी कारगर होगी रिपोर्ट
विनीत शर्मा
सूरत. मनपा के हाइड्रोलिक विभाग ने भले भविष्य की प्यास को देखते हुए तापी नदी में एक्वीफर मैपिंग कराई हो, इसके दूरगामी लाभ शहर को मिलने तय हैं। इससे जहां नदी की सेहत को समझने और सुधारने में मदद मिलेगी, शहर में तापी नदी किनारे नियोजित विकास का खाका खींचने में भी मनपा को मदद मिलेगी। इसके अलावा भूकंप के असर को पढऩे में भी यह रिपोर्ट सहायक साबित होगी।
भविष्य में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मनपा के हाइड्रोलिक विभाग ने तापी नदी में एक्वीफर मैपिंग की मदद से कैविटी स्पॉट खोजने की कवायद शुरू की थी। इसके लिए हैदराबाद से एनजीआरआई की टीम कई बार सूरत आई और गाय पगला से मगदल्ला तक नदी का हवाई सर्वे कर एक्वीफर मैपिंग की। रक्षा मंत्रालय से मंजूरी के बाद हाल ही इसकी प्राथमिक रिपोर्ट मनपा प्रशासन को मिली है। हाइड्रोलिक विभाग फिलहाल इसका अध्ययन कर रहा है। प्राथमिक रिपोर्ट में बताए गए कैविटी स्पॉट्स और नदी में वास्तविक हालत के तुलनात्मक अध्ययन के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी।
हाइड्रोलिक टीम ने शुरुआत में एक्वीफर मैपिंग कर नदी में कैविटी स्पॉट्स को समझकर भविष्य की जरूरत के हिसाब से फ्रेंचवेल और पानी के अन्य स्रोतों को खोजने पर फोकस किया था। यह रिपोर्ट हाइड्रोलिक टीम के साथ ही शहर के समग्र विकास में भी सहायक होने जा रही है। एक्वीफर मैपिंग की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर मनपा का शहरी विकास विभाग नदी किनारे नए निर्माण को मंजूरी देते समय एहतियात बरत सकता है। नए हाइवे या नदी पुलों के साथ ही मगदल्ला में प्रस्तावित कोजवे और कई अन्य प्रोजेक्ट्स में भी यह रिपोर्ट मार्गदर्शक बन सकती है। नदी की हाइड्रोलॉजी को समझने में भी एक्वीफर मैपिंग रिपोर्ट मददगार साबित होगी। इस रिपोर्ट के माध्यम से सिल्ट और अन्य वजहों से नदी की खराब हो रही सेहत को सुधारने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस रिपोर्ट के आधार पर नदी में नीचे तल पर बैठे रेत की खराब हो रही गुणवत्ता और रेत के साथ मिटटी के मिलने से प्रभावित हो रही नदी की भरण क्षमता को दुरुस्त किया जा सकता है।
एक्वीफर मैपिंग नदी के नीचे बहती नदी को समझने का ही विज्ञान नहीं है। एक्वीफर मैपिंग की रिपोर्ट शहरभर में जमीन के नीचे का एक्सरे भी है। इसकी मदद से नदी में ड्रेजिंग करने के लिए भी गाइडलाइन तय की जा सकेगी। सूरत में प्रस्तावित मेट्रो ट्रेन के ट्रैक के लिए भी यह रिपोर्ट सहायक दस्तावेज साबित हो सकती है।
सूरत भूकंप जोन तीन में
सूरत भूकंप जोन तीन में आता है। ऐसे में हाइराइज इमारतों में रह रहे लोगों की सांसें अटकी रहती हैं। देशभर में कहीं भी भूकंप के झटके लगते हैं तो आसमान छू रही इमारतों में रह रहे सूरतीयों के दिल भी हिचकोले खाने लगते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर सॉयल टैस्टिंग कराकर हाइरिस्क एरिया में हाइराइज को रोका जा सकता है।
यह है एक्वीफायर मैपिंग
जमीन के नीचे एक कैविटी स्पॉट बनता है, जहां भूजल रिचार्ज से पानी का अथाह भंडार जमा होता रहता है। यह जल प्राकृतिक रूप से प्यूरीफाई होता रहता है और सीधे पीने लायक होता है। एक्वीफायर मैपिंग के तहत हैलीकॉप्टर ड्रोन की मदद से जमीन के नीचे कैविटी स्पॉट खोजे जाते हैं। इसमें ड्रोन जमीन के नीचे लेजर बीम छोड़कर सेंसरिंग करता है। इसकी थ्री डी इमेज जमीन के नीचे कैविटी स्पॉट (पानी के स्रोत) चिन्हित करती है। कैविटी स्पॉट पर ही पंक्चर करने से कम मेहनत में उच्च गुणवत्ता का पानी मिल जाता है।
यह होंगे खास फायदे
-शहर की टाउन प्लानिंग में सहायक होगी रिपोर्ट।
-तापी की हाइड्रोलॉजी समझने और नदी की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी।
-मेट्रो ट्रैक की टनल का रूट तय करने में मदद मिलेगी।
-तापी पर बने पुलों के साथ ही भविष्य में बनाए जाने वाले नदी पुलों की लोकेशन तय करने में मदद मिलेगी।
-एक्वीफर मैपिंग मगदल्ला में प्रस्तावित वीयर कम कोजवे के निर्माण में सहयोगी रहेगी।
-भविष्य में अकाल पड़ा तो पीने को भरपूर पानी उपलब्ध होगा।
Published on:
27 Aug 2018 12:21 pm
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