
Pappu Power
सूरत/बारडोली।सरदार पटेल की कर्मभूमि बारडोली कस्बे के रेलवे स्टेशन की शोभा बढ़ाने के लिए 35 साल पुराना शंटिंग डीजल इंजन प्रवेशद्वार पर स्थापित करने की योजना है। उधना स्टेशन पर कुछ दिन रखे जाने के बाद मंगलवार को यह इंजन बारडोली स्टेशन पहुंचा। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने इस सेवानिवृत्त शंटिंग डीजल इंजन को स्टेज पर स्थापित करने का कार्य शुरू किया है।
सरदार वल्लभभाई पटेल की कर्मभूमि बारडोली के रेलवे स्टेशन के विकास पर पश्चिम रेलवे ने भी ध्यान केन्द्रित किया है। पिछले दिनों पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक एके गुप्ता ने ताप्ती लाइन पर दोहरीकरण के कार्य के चलते कई बार निरीक्षण किया था। इसी दौरान उन्होंने ताप्ती लाइन के महत्वपूर्ण स्टेशनों का निरीक्षण किया। बारडोली स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पप्पू पावर के नाम से पहचाने जाने वाले डीजन शंटिंग इंजन को स्थापित करने के निर्देश दिए थे।
इस पर अब अमल शुरू हो गया है। मुम्बई मंडल से यह इंजन दो-तीन दिन पहले उधना स्टेशन पहुंचा था। मंगलवार को इसे बारडोली स्टेशन पर लाया गया। सूरत स्टेशन के असिस्टेन्ट मैकेनिकल इंजीनियर भुवनचन्द्र जोशी भी बारडोली स्टेशन पर मौजूद थे। दो क्रेन की मदद से इंजन को उठाकर प्रवेशद्वार पर रखने की कार्रवाई की गई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस डीजल शंटिंग इंजन को दो साल पहले रेलवे से सेवानिवृत्त कर दिया गया है।
डीजल इंजनों को स्क्रेप में भेजने की जगह इसे धरोहर की तरह रेलवे की विरासत के साथ जोडऩे का प्रयास शुरू किया गया है। सरदार वल्लभभाई पटेल की कर्मभूमि बारडोली स्टेशन से एक नई शुरूआत की गई है। सूत्रों ने बताया कि महाप्रबंधक इसके अनावरण के लिए शीघ्र बारडोली आ सकते हैं। हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है। दक्षिण गुजरात में सबसे पहले बारडोली रेलवे स्टेशन से हुई नई शुरूआत यहां के निवासियों के लिए गौरव की बात है।
ट्रेलर में रखकर इंजन को लाए प्रवेशद्वार तक
सरदार की कर्मभूमि और एनआरआई क्षेत्र के रूप में मशहूर बारडोली की शान बढ़ाने के लिए दक्षिण गुजरात में सबसे पहले बारडोली स्टेशन पर डीजल शंटिंग इंजन स्थापित करने के लिए पसंद किया गया है। रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण के बाद मंगलवार को पप्पू पावर नाम का इंजन बारडोली पहुंचा। करीब ग्यारह बजे रेलवे स्टेशन आने के बाद उसे अन्य इंजन के जरिए अस्तान रोड की ओर के अंतिम छोर के ट्रेक पर ले जाया गया। यहां रेलवे के 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद से ट्रेक से उतारने के बाद दो हैवी क्रेन के जरिए उसे एक ट्रेलर में रखकर रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार तक लाया गया। इस दौरान यातायात को थोड़ी देर के लिए रोका गया था।
मंडल कार्यालयों पर हैं भाप इंजन
पश्चिम रेलवे के सीनियर पीआरओ गजानंद ने बताया कि जोन तथा मंडल के मुख्यालयों वाले स्टेशन के प्रवेश द्वार पर भाप इंजन स्थापित किए गए हैं। रेलवे में भाप इंजन पुरानी बात हो गई है, लेकिन पश्चिम रेलवे ने पुरानी विरासतों को संजोने के लिए इन ऐतिहासिक इंजनों को मंडल कार्यालय के बार स्थापित करने की व्यवस्था की है। हाल में पश्चिम रेलवे के मुख्यालय चर्चगेट तथा छह मंडल मुम्बई, वडोदरा, अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर और रतलाम मंडल कार्यालय के बाहर भाप इंजन को याद के तौर पर स्थापित किया गया है।
इंजन एक नजर में
60 टन इंजन का वजन
35 साल करीब इंजन की आयु
50 से अधिक कार्य के दौरान जुड़े कर्मचारी
19683 इंजन नम्बर
02 क्रेन (एक 60 टन और दूसरी 175 टन क्षमता)
डबल्यूडीएस 4 डी इंजन का अधिकारिक नाम
Updated on:
17 Jan 2018 05:16 am
Published on:
17 Jan 2018 05:07 am

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