दक्षिण गुजरात चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आयोजन में विशेषज्ञों ने दी सलाह
सूरत. कई बार रकम फंसने से कारोबारी इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी के जाल में उलझ जाते हैं। दक्षिण गुजरात चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने ऐसे कारोबारियों को एमएसएमई काउंसिल में अपील करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने कई नियम बनाए हैं।
दक्षिण गुजरात चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने शुक्रवार को नानपुरा स्थिति समृद्धि भवन में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल एक्ट के बारे में जागरुकता के लिए सेमिनार का आयोजन किया था। सेमिनार में ट्रिब्यूनल अहमदाबाद की पूर्व ज्यूडीशियल मेम्बर डाॅ. दीप्ति मुकेश ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल एक्ट की बारीकियां समझाईं। उन्होंने कहा कि कई बार कारोबार के सिलसिले में उधार दी रकम फंस जाती है तो कई बार कारोबारी बैंक से लिया उधार नहीं चुका पाते। इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी दोनों ही स्थितियों में कारोबारी को मुश्किल पेश आती है। कई बार तय समय में भुगतान नहीं आने से भी दिक्कतें होती हैं। इन स्थितियों से निपटने के लिए कारोबारियों को एमएसएमई काउंसिल में जाना चाहिए।
बैंक ऑफ बड़ौदा की स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच अहमदाबाद के मुख्य प्रबंधक भावेश मोदी ने कहा कि कंपनी को वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए ताकि कंपनी ठीक से चल सके। बैंक की पहली कोशिश सैटलमेंट की होती है। इसमें कारोबारियों को सहयोग करना चाहिए। सीए कैलाश शाह ने कहा कि जब कोई कंपनी एनसीएलटी में जाती है तो अंतिम अथॉरिटी एनसीएलटी होती है।इससे पहले चैम्बर अध्यक्ष हिमांशु बोड़ावाला ने सेमिनार के आयोजन का उद्देश्य सामने रखा। चैम्बर के प्रेसिडेंट इलेक्ट रमेश वघासिया ने आभार व्यक्त किया।
चैम्बर की बैंकिंग कमेटी चेयरमैन सीए विपुल शाह ने कार्यक्रम और प्रश्नोत्तरी सत्र का संचालन किया। इस अवसर पर चैम्बर के मानद मंत्री भावेश टेलर, बैंकिंग (सहकारी क्षेत्र) समिति के अध्यक्ष डॉ. जयना भक्त, राजीव कपासियावाला, हर्षल दरीवाला, अरविंद बाबावाला समेत अन्य पदाधिकारी और कारोबारी मौजूद रहे।