
प्रदीप मिश्रा
सूरत.
बदलते फैशन और जीएसटी के जंजाल के कारण सूरत के कपड़ा व्यापारियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। खासकर ड्रेस मटीरियल्स के व्यापारियों के लिए व्यापार में टिका पाना मुश्किल हो गया है। कॉटन ड्रेस जीन्स, लेगिन्स की बढ़ती मांग के कारण सूरत का ड्रेस व्यापार पचास प्रतिशत रह गया है। इससे कई व्यापारियों ने साड़ी का व्यापार अपना लिया तो कइयों ने कोई और व्यापार शुरू कर दिया है।
व्यापारी इन हालात के लिए कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि ड्रेस मटीरियल्स का व्यापार साड़ी के व्यापार की अपेक्षा ज्यादा मेहनत वाला है। ड्रेस के व्यापारी को सतत सक्रिय रहना पड़ता है। ड्रेस में फैशन जल्दी-जल्दी बदलता है, इसलिए व्यापारी को क्रिएटिव रहना पड़ता है। ड्रेस तीन पार्ट में बंटे होने के कारण टॉप, दुपट्टे और सलवार के लिए तीन प्रकार के ग्रे खरीदने पड़ते हैं। इन्हें अलग-अलग जगह प्रोसेसिंग के लिए भेजना पड़ता है। जब तक तीनों तैयार होकर नहीं आ जाएं, तब तक बिक नहीं सकते। तीनों तैयार होने में 25 दिन से अधिक समय लग जाता है और व्यापारी की पूंजी फंसी रहती है। इससे ड्रेस का व्यापार मुश्किल हो गया है। लगभग पांच साल पहले सूरत के पॉलिएस्टर ड्रेस मटीरियल्स के सामने अहमदाबाद, इरोड और जैतपुर के कॉटन कपड़ों ने बड़ी चुनौती पेश की। युवतियों और महिलाओं को कॉटन ड्रेस पसंद आने के कारण पॉलिएस्टर कपड़ों की मांग बिल्कुल घट गई। सूरत एयरपोर्ट की कई शहरों से कनेक्टीविटी नहीं होने से भी नुकसान हुआ। अन्य राज्यों के व्यापारी अहमदाबद जाते और ऑर्डर बुक कर वापस चले जाते। इससे सूरत के व्यापारियों का व्यापार लगातार घटता गया। हालात को देखते हुए सूरत के कई व्यापारी अहमदाबाद और अन्य मंडियों में व्यापार करने चले गए। कई व्यापारियों ने साड़ी का व्यापार शुरू कर दिया। कुछ ने ड्रेस में गुजारा नहीं देखते हुए ड्रेस के साथ साड़ी का व्यापार भी शुरू कर दिया। आज भी ड्रेस व्यापारियों की राह मुश्किल भरी है। जीएसटी के बाद व्यापार और कठिन होता जा रहा है।
जीन्स, कुर्ती और लेगिन्स का दबदबा
महिलाओं को ड्रेस के विकल्प में कुर्ती और लेगिन्स मिल जाने से ड्रेस की बिक्री पर मार पड़ी है। व्यापारियों का कहना है कि कम से कम कीमत वाली ड्रेस के 200 रुपए और उसकी सिलाई के 200 रुपए देने की अपेक्षा महिलाएं 100 रुपए की लेगिन्स और 100 रुपए का टॉप खरीदना पसंद करती हैैं। पहनने में आरामदायक होने से भी उनकी डिमांड बढ़ रही है। आधुनिक महिलाएं कार्यस्थल, बाजार आदि में लेगिन्स के साथ कुर्ती या टॉप पहनना पसंद करती हैं। कुर्ती का कपड़ा सूरत में कम बनता है, अन्य राज्यों से ज्यादा आता है। इस कारण भी सूरत का ड्रेस मार्केट ठप होता जा रहा है।
पॉलिएस्टर कपड़ों का व्यापार चौपट
व्यापारियों का कहना है कि बदलते फैशन और कॉटन कपड़ों की मांग बढऩे के कारण सूरत के पॉलिएस्टर कपड़ों का व्यापार चौपट हो गया है। सूरत के कई व्यापारी अब कॉटन ड्रेस का व्यापार करने लगे हैं। बदलते फैशन के सामने ड्रेस मटीरियल्स का व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है। पिछले पांच साल में 25 प्रतिशत से अधिक व्यापारी साड़ी और अन्य व्यवसाय में चले गए।
व्यापारी लाचार
कपड़ा बाजार के ड्रेस व्यापारी बदलते फैशन और जीएसटी के कारण लाचार हैं। पहले ड्रेस मटीरियल्स में थ्री पीस तैयार करने में जितना कपड़ा चाहिए होता था, लेगिन्स और कुर्ती में उसकी अपेक्षा सिर्फ 30 प्रतिशत कपड़ा चाहिए। सूरत के पॉलिएस्टर कपड़ों की अपेक्षा कॉटन कपड़ो की मांग ज्यादा होने से भी स्थानीय व्यापारी लाचार हैं।
देवकिशन मंघाणी, व्यापारी
बदल रहे हैं व्यवसाय
ड्रेस मटीरियल्स का व्यापार साड़ी की अपेक्षा कठिन है। ड्रेस तैयार करने में ज्यादा समय लगता है और पूंजी रोकनी पड़ती है। इसके अलावा अब महिलाएं जीन्स, लेगिन्स और अन्य कपड़े पसंद करती हैं। ड्रेस का व्यापार घटने से पांच साल में पच्चीस प्रतिशत से अधिक व्यापारियों ने व्यापार बदल दिया है।
जगदीश लालवाणी, व्यापारी
टिकना मुश्किल
पॉलिएस्टर कपड़ों की मांग घटने और फैशन में नए परिवर्तन के कारण सूरत के ड्रेस व्यापारियों के लिए दिक्कत पैदा हो गई है। मैंने परिस्थिति को देखते हुए ड्रेस के अलावा साड़ी का व्यापार भी शुरू कर दिया है।
विक्रम अग्रवाल, व्यापारी
अपग्रेड की आवश्यकता
सूरत के कपड़ा व्यापारियों को अपग्रेड होने की आवश्यकता है। जो व्यापारी क्रिएशन और अच्छा काम देंगे, उन्हें दिक्कत नहीं होगी।
अजित अग्रवाल, व्यापारी

Published on:
16 Mar 2018 09:46 pm

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