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SURAT KAPDA MANDI: खोया बहुत, पाया फिलहाल…

कहने को भले ही दीपावली सीजन सूरत कपड़ा मंडी का बेहद अच्छा रहा, लेकिन गंवाने को पूरा साल रहा  

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SURAT KAPDA MANDI: खोया बहुत, पाया फिलहाल...

SURAT KAPDA MANDI: खोया बहुत, पाया फिलहाल...

सूरत. प्रतिदिन तीन से चार करोड़ मीटर कपड़ा बनाने वाली और लाखों लोगों को रोजगार देने वाली सूरत कपड़ा मंडी ने कोरोना काल में बहुत कुछ खोया है। सूरत कपड़ा मंडी के पिछले नौ महीने में खोने की फेहरिश्त पर 'कोरोना काल कब सुधरेगा कपड़ा बाजार का हाल...Ó अभियान में राजस्थान पत्रिका के पाठक सिलसिलेवार कई पहलुओं को जानने का अवसर मिलेगा। सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारिक पहलुओं पर कपड़ा बाजार के ही वर्षों के अनुभवी और कारोबार के पारखी व्यापारियों के नजरिए का लाभ भी इस अभियान में पढऩे-समझने को मिलेगा। कोरोना काल के पहले करीब तीन माह तो यूं ही बीत गए थे, जिसमें भी 72 दिन तक सूरत कपड़ा मंडी लगातार बंद रही थी। हालांकि इस लम्बी अवधि के बंद के दौरान सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारी भाईयों ने जो अपनों का दर्द बांटने का कार्य विभिन्न सेवाभावी संस्थाओं के साथ मिलकर किया था, वो भी अविस्मरणीय है। शायद वो भरोसा ही था जिससे हजारों-लाखों श्रमिक सूरत से जाने के बाद भी यहां अपनों और उनकी अपणायत को नहीं भूल पाए और उन्हीं की बदौलत अनलॉक-1 के प्रारम्भिक चरण जून-जुलाई में सूरत कपड़ा उद्योग 25-30 फीसदी से अगस्त-सितम्बर के बीच ही 65-70 फीसदी तक रनिंग कंडीशन में पहुंच गया था और हाल की मौजूदा परिस्थिति में सूरत कपड़ा मंडी 90 फीसदी के आसपास बेहतर ढंग से संचालित है।

'कोरोना काल कब सुधरेगा कपड़ा बाजार का हाल...Ó अभियान में सूरत कपड़ा उद्योग की रीढ़ की हड्डी ट्रेडर्स के समक्ष खड़ी उन समस्याओं पर फोकस किया जाएगा जो कि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ना केवल कपड़ा उद्योग बल्कि सरकार व सूरत में आम जन के रोजमर्रा के जीवन को भी प्रभावित करती है, हालांकि सूरत और सुरतीयो को फीनिक्स के समान कहा गया है और वे अपनी जीवटता, कार्य कुशलता और अथक मेहनत से गुजरे कल को संवरे कल में बदलने का माद्दा रखते हैं।
क्रमश...