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SURAT KAPDA MANDI: व्यापारियों के ‘घर’ के लोकतंत्र की मजबूती की भी उठी मांग

- फोस्टा चुनाव के बाद सूरत कपड़ा मंडी के विभिन्न टेक्सटाइल मार्केट के हजारों व्यापारियों में जगी आस :: - 80 फीसदी से ज्यादा मार्केट संगठनों के नाम पर वर्षों से बने हैं कमजोर    

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SURAT NEWS DAYRI: तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे कपड़ा व्यापारी

SURAT NEWS DAYRI: तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे कपड़ा व्यापारी

सूरत. फैडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन (फोस्टा) के लंबे अंतराल के बाद चुनाव क्या हुए, सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों की उम्मीदें परवान चढ़ गई है। अब स्थिति ऐसी बनने लगी है कि कपड़ा व्यापारी अपने ही ‘घर’ (टेक्सटाइल मार्केट्स) में लोकतंत्र को मजबूत होने के मंसूबे बांधने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सूरत कपड़ा मंडी के 80 फीसदी से ज्यादा टेक्सटाइल मार्केट्स मजबूत संगठन (ट्रेडर्स एसोसिएशन) का अभाव झेल रहे हैं। यहां वर्षों से बिल्डर्स समूह मार्केट्स पर आधिपत्य जमाकर बैठे हैं। कई मार्केट्स में तो यह स्थिति 20-20 साल से बनी हुई है। यहां कुछ व्यापारियों को कमेटी में जोड़कर ‘केयरटेकर’ की भूमिका बिल्डरों ने दे रखी है, ताकि उनके पक्ष में व्यापारियों के बीच माहौल अनुकूल बना रहे।

पिछले महीने जुलाई में ही हजारों कपड़ा व्यापारियों के मातृ संगठन फोस्टा के 11 साल बाद चुनाव हुए और नई कार्यकारिणी का गठन हुआ। वहीं, एक अन्य व्यापारिक संगठन आढ़तिया कपड़ा एसोसिएशन सूरत (बदला हुआ नाम) के 12 साल बाद 20 अगस्त को चुनाव होंगे। इस चुनावी माहौल के बीच कपड़ा व्यापारियों में भी अब अपने-अपने मार्केट्स में नई ट्रेडर्स एसोसिएशन के चुनाव व गठन होने की आस जगने लगी है। कई मार्केट्स में व्यापारियों की ट्रेडर्स एसोसिएशन है तो कई मार्केट्स में वर्षों से गिने-चुने व्यापारी ही यह जिम्मा संभाले हुए हैं। वहीं, सूरत कपड़ा मंडी के ज्यादातर बड़े-बड़े टेक्सटाइल मार्केट्स में यह जिम्मा बिल्डर्स समूह के हाथों में ही वर्षों से है।

- मार्केट परिसर व्यापारी का दूसरा ‘घर’

हजारों व्यापारियों समेत अन्य कई लोग परिवार को जितना समय देते हैं, संभवत: उससे ज्यादा समय वे अपने व्यापारिक कर्म क्षेत्र सूरत कपड़ा मंडी के विभिन्न टेक्सटाइल मार्केट्स में देते हैं। यही वजह है कि व्यापारी मार्केट्स को अपना दूसरा ‘घर’ मानते हैं। व्यापारी रामरतन बोहरा बताते हैं कि इसे दुरुस्त रखने व संचालित करने की जिम्मेदारी सभी मार्केट्स में व्यापारियों के पास ही रहनी चाहिए, क्योंकि आखिर इसका मैंटेनेंस भी तो व्यापारी ही देता है।

- फोस्टा संगठन से भी उम्मीद :

व्यापारियों ने बताया कि प्रत्येक मार्केट में व्यापारिक संगठन होना चाहिए और इसमें नवगठित फोस्टा को भी उनके सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। कई मार्केट्स में वर्षों से चुनाव नहीं हुए हैं, यह भी गलत है।

- मुश्किलें हैं कई तो फायदे भी हैं :

व्यापारिक संगठन के अभाव में संचालित टेक्सटाइल मार्केट्स में कई तरह की दिक्कतों का सामना रोजाना करना पड़ता है। इसमें सुलभ सुविधा, मैंटेनेंस-पार्किंग चार्ज, मार्केट विकास समेत अन्य कई तरह की परेशानियां है। वहीं, व्यापारिक संगठन के संचालन वाले टेक्सटाइल मार्केट्स में मार्केट परिसर का विकास, व्यापारिक जरूरतों की यथासंभव पूर्ति, मार्केट के व्यापारियों का महत्व और मैंटेनेंस राशि से मार्केट एसोसिएशन के पास जमा धनकोष। जिससे समय पर अतिरिक्त कार्य भी पूरे किए जा सकते हैं।

0- संघर्ष को मिली थी सफलता, आज सबकुछ बेहतर :

रघुकुल टेक्सटाइल मार्केट में 20 साल से ज्यादा वक्त तक बिल्डर समूह का ही दखल रहा, लेकिन कुछ समय पहले मार्केट के व्यापारियों ने ठाना और सोसायटी गठन की जीत हासिल की। तब से अब तक रघुकुल मार्केट विकास के कई आयाम को छू रहा है। एक बड़ी राशि का भी संग्रह कर ररा है। यह सब व्यापारियों के ‘घर’ में लोकतंत्र मुस्कुराने से ही संभव हो पाया है।

- श्रवण मेंगोतिया, अध्यक्ष, रघुकुल टेक्सटाइल मार्केट सोसायटी।

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