- मिलेनियम मार्केट में एमएमटीए की फिर से सक्रियता, अन्य टेक्सटाइल मार्केट्स में भी होने लगी हैं बैठकें : - कम खाओ-गम खाओ के समान कम व्यापारिक जागृति लाने का बैठकों में होता है प्रयास:
सूरत. सूरत कपड़ा मंडी के रिंगरोड कपड़ा बाजार में व्यापारिक चहल-पहल के केंद्र मिलेनियम टेक्सटाइल मार्केट में एक बार फिर से व्यापारिक जागृति की मुहिम व्यापारियों द्वारा ही छेड़ी गई है। मिलेनियम मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन जहां प्रत्येक सप्ताह बैठक में उलझे हुए व्यापारिक मसलों को आपसी सहमति से सुलझाती है वहीं, कम व्यापार-नकद व्यापार के प्रति एक पुरानी कहावत कम खाओ-गम खाओ के समान कपड़ा व्यापारियों में जागरुकता लाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं।
करीब आठ-दस साल पहले कमेला दरवाजा के निकट स्थित मिलेनियम टेक्सटाइल मार्केट के कपड़ा व्यापारियों ने मिलेनियम मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन बनाकर आपसी व्यापारिक मामलों को सोशल मीडिया के प्लेटफार्म व बातचीत के माध्यम से सुलझाते थे। एमएमटीए ने मार्केट परिसर में बैठकों का सिलसिला दो-तीन वर्षों तक लगातार चलाया और बाद में यह तरीका सूरत कपड़ा मंडी के अन्य टेक्सटाइल मार्केट्स के व्यापारियों ने भी अपनाया था। हालांकि नोटबंदी व जीएसटी लागू होने के बाद ऐसी व्यापारिक बैठकें मार्केट परिसर में कम हो गई थी। गत जुलाई में व्यापारिक संगठन फैडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के नए सिरे से चुनाव हुए और तभी से मिलेनियम मार्केट में भी फिर से कपड़ा व्यापारियों की एमएमटीए सक्रिय हुई है। एसोसिएशन की बैठक में कमलेश जैन, उमेश पोद्दार, भरत बरमेशा, विकास देसाई, भरत लूनिया, मेवासिंह रोहिला, मोंटू जैन आदि कपड़ा व्यापारियों की सक्रियता रहती है।
-बीते दो माह में अन्य टेक्सटाइल मार्केट्स तक बनाई पहुंच :
एसोसिएशन की बैठकों का दौर प्रत्येक शनिवार को मिलेनियम मार्केट में ही एक व्यापारिक प्रतिष्ठान पर चलता है। यहां अन्य मार्केट्स के व्यापारी भी पहुंचते हैं और वे एसोसिएशन की कार्य पद्धति देख अपने टेक्सटाइल मार्केट्स में भी कुछ व्यापारियों के सहयोग से आजमाने लगे हैं। एसोसिएशन के कमलेश जैन ने बताया कि बैठक में व्यापारिक जागृति के उद्देश्य से सभी को कम व्यापार-नकद व्यापार के बारे में भी बताया जाता है। नकद व्यापार से तात्पर्य असीमित अवधि की उधारी और डूबत से रोकना है। ज्यादातर बैठकों में कपड़ा व्यापारी भी इस मुहिम के प्रति सकारात्मक नजर आते हैं।
- व्यापारिक पहचान की भी होती है चर्चा :
एसोसिएशन से जुड़े मोंटू जैन ने बताया कि बैठक में नियमित व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा व आपसी सहमति से समाधान की प्रक्रिया के अलावा व्यापार के तौर-तरीकों में समय के साथ बदलाव लाने की बात भी कपड़ा व्यापारियों के साथ की जाती है। इसमें भी खास तौर पर व्यापार में जरूरी व्यापारिक पहचान के प्रति भली-भांति विचार व जांच-पड़ताल की जरूरत के बारे में सभी व्यापारियों को बैठक में आगाह किया जाता है। बैठक के दौरान कपड़ा व्यापारियों के अलावा एजेंट-आढ़तिए, वीवर्स समेत कपड़ा कारोबार से जुड़े अन्य घटक के लोग शामिल रहते हैं।