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SURAT HUMAN NEWS: पक्षियों की जान जोखिम में…कॉल का सिलसिला जारी

-मकर संक्रांति के दस दिन बाद भी जीवदया प्रेमियों को मिल रहे हैं सोसायटी में धागों में फंसे शांतिदूत को बचाने के लिए कॉल  

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SURAT HUMAN NEWS: पक्षियों की जान जोखिम में...कॉल का सिलसिला जारी

SURAT HUMAN NEWS: पक्षियों की जान जोखिम में...कॉल का सिलसिला जारी

सूरत.पतंगबाजी का शौक मकर संक्रांति के दस दिन बाद भी शांतिदूत कबूतरों की जान जोखिम में डाले हुए है। शहर के जीवदया प्रेमियों के पास हाइराइज सोसायटियों में 20 से 100 फीट ऊंचाई पर तेजधार धागों में फंसकर फड़फड़ाते हुए पक्षियों को बचाने के कॉल लगातार मिल रहे हैं। ऊंचाई पर तेजधार धागे में फंसे कबूतर समेत अन्य पक्षियों को बचाने के लिए जीवदया प्रेमी, दमकल विभाग व संस्था संयुक्त रूप से शहर में कार्य कर रही है।

शहर के जीवदया प्रेमियों ने मकर संक्रांति को ध्यान में रख पक्षियों को बचाने की मुहिम 14 जनवरी से पहले ही शुरू कर दी थी। इसमें परवत पाटिया क्षेत्र में प्रेमाल जीवदया ट्रस्ट ने आदिनाथ दिगंबर जैन मंडल, मॉडलटाउन और निष्काम कर्म सेवा फाउंडेशन के साथ मिलकर जीवदया का कार्य शुरू किया था। अभी तक इन संस्थाओं ने अकेले परवत पाटिया क्षेत्र में से पौने दो सौ से ज्यादा पक्षियों के जीव बचाने का सार्थक जतन किया है। इस संबंध में मेरा गांव-मेरा परिवार संस्था के जीवदया प्रेमी हनुमान प्रजापति ने बताया कि मकर संक्रांति गए दस दिन हो गए, लेकिन अभी भी रोजाना 3-4 कॉल पक्षियों के सोसायटियों में धागे में फंसकर लटके होने के कॉल मिल रहे हैं। सोसायटी में ऊंचाई पर लटके पक्षियों को बचाने के लिए जीवदया प्रेमी, दमकलकर्मी, संस्था व अस्पताल कर्मी संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।

-यूं करते हैं जीव बचाने के जतन

जैसे ही जीवदया प्रेमियों व संस्थाओं को पक्षी के धागे में फंसकर लटके होने की जानकारी मिलती है। वे पहले स्थल पर पहुंचते हैं। यहां पक्षी के लटकने की ऊंचाई जानकर डुंभाल दमकल को जानकारी दी जाती है। दमकलकर्मी हाइड्रोलिक प्लेटफार्म से पक्षी तक पहुंचते है और उसे नीचे उतारते हैं। इसके बाद नीचे मौजूद जीवदया प्रेमी फर्स्ट एड बॉक्स से तत्काल पक्षी का उपचार कर उसे संस्था के क्लीनिक-अस्पताल ले जाता है। यहां 3-4 दिन तक घायल पक्षी की देखभाल के बाद स्वस्थ होने पर उसे खुले गगन में उड़ने को आजाद कर देते हैं।

-भवन-मंदिर में संचालित क्लीनिक-अस्पताल

पतंग की तेजधार डोर से घायल पक्षियों के उपचार के लिए करुणा, प्रेमाल जीवदया ट्रस्ट, श्रीसाधुमार्गी जैन संघ आदि संस्थाओं ने समता भवन, आदिनाथ जैन मंदिर में अस्थाई क्लीनिक-अस्पताल संचालित किए हैं। यहां घायल पक्षियों के उपचार के बाद स्वस्थ होने पर उन्हें छोड़ दिया जाता है। करुणा संस्था ने तेज धार डोर से घायल दो सौ से ज्यादा पक्षियों को स्वस्थ होने पर मुक्त किया है। इनमें शांतिदूत कबूतर के अलावा कौए, तोते, उल्लु आदि पक्षी शामिल रहे हैं।