
SURAT NEWS: आचार्य महाश्रमण का कामरेज से परवत पाटिया विहार आज
सूरत. तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण धवल सेना के साथ शुक्रवार को सूरत महानगर में प्रवेश करेंगे। आचार्य प्रवर व संतवृंद के सूरत आगमन के मौके पर पलक-पांवड़े बिछाकर स्वागत की तैयारियां तेरापंथ समाज ने पूरी कर ली है। कामरेज से परवत पाटिया िस्थत तेरापंथ भवन तक के मार्ग में जगह-जगह स्वागत-अभिनंदन किया जाएगा और पुणा पाटिया स्थित दर्शन रेजिडेंसी से अणुव्रत यात्रा रैली का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम की सभी तैयारियां श्रीजैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, परवत पाटिया ने पूरी कर ली है।कामरेज से पुणा पाटिया तक आचार्य महाश्रमण व उनकी धवल सेना के साथ-साथ बड़ी संख्या में तेरापंथ समाज के लोगों के अलावा अन्य श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। दर्शन रेजिडेंसी से यह यात्रा अणुव्रत यात्रा रैली के रूप में परिवर्तित हो जाएगी। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष व अन्य लोग मौजूद रहेंगे। बाद में यहां से रैली विभिन्न मार्ग से होकर परवत पाटिया में एचटीसी मार्केट के सामने स्थित प्रांगण में पहुंचेगी। यहां पर आचार्य महाश्रमण के दर्शन-प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल, केंद्रीय मंत्री दर्शना जरदोष, विधायक संगीता पाटिल समेत कई आमंत्रित मेहमान व हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। इसके बाद 22 अप्रेल को सुबह सात बजे आचार्य महाश्रमण विहार करके वेसू स्थित भगवान महावीर यूनिवर्सिटी प्रांगण पधारेंगे। यहां पर 23 अप्रेल को आयोजित 1111 वर्षीतप तपस्या पारणा कार्यक्रम में शामिल होंगे।
0 तपस्वियों के सम्मान में भजन संध्या :वहीं, परवत पाटिया स्थित तेरापंथ भवन के पास बुधवार शाम वर्षीतप के तपस्वियों के तप अनुमोदनार्थ भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय कलाकारों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
0 -‘ज्ञान को आचार में परिणत करने को जरूरी है श्रद्धा सेतु’
उधर, सायन से विहार कर आचार्य महाश्रमण गुरुवार को कामरेज पधारे। इस दौरान मार्ग में स्वामीनारायण, स्थानकवासी, मूर्तिपूजक जैन संप्रदाय, दाउदी बोहरा के संतों व अनुयायियों ने अणुव्रत यात्रा का स्वागत किया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने प्रवचन में बताया कि शास्त्रकारों ने मोक्ष के लिए चार मार्ग ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप बताया है। कोरा ज्ञान, कोरा दर्शन, कोरा चरित्र और कोरा तप कभी भी मोक्ष तक नहीं पहुंचाते। उन्होंने बताया कि नदी के दो तट होते हैं। एक तट से दूसरे तट पर जाने के लिए सेतु अर्थात् पुल का होना जरूरी है, वैसे ही सम्यक ज्ञान को सम्यक आचार में परिवर्तित करने के लिए श्रद्धा रूपी सेतु जरूरी है। जीवन में परिवर्तन के लिए कुछ वाक्य भी काफी होते हैं। कभी-कभी संत पुरुषों का एक प्रवचन जीवन की दिशा और दशा बदल देता है। आचार्यश्री ने अणुव्रत यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि अणुव्रत के नियम जीवन में अपनाकर हम अपने जीवन को लक्षित मंजिल तक पहुंचा सकते हैं।
इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा ने बताया कि जैसे खीर बनाने के लिए दूध, शक्कर और चावल की जरूरत होती है, वैसे ही मोक्ष प्राप्ति के लिए सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चारित्र का त्रिवेणी संगम जरूरी है। इस अवसर पर कामरेज तेरापंथ सभा के अध्यक्ष कंवरलाल धूपिया, स्थानकवासी जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष मुकेश कोठारी, पिंटू मांडोत, महावीर गन्ना, प्रवीण बाबेल आदि ने अपने भाव व्यक्त किए।
Published on:
20 Apr 2023 09:58 pm

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