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SURAT SCHOOL : डिंडोली में छोटे-से घर में चल रहा ज्ञानमंदिर विद्यालय

अभियान का असर- नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ डीइओ ने शुरू की कार्रवाई

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SURAT SCHOOL : डिंडोली में छोटे-से घर में चल रहा ज्ञानमंदिर विद्यालय

सूरत.

दुकानों में चल रहे स्कूलों के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से आखिरकार कार्रवाई की शुरुआत की गई है। डिंडोली में छोटे-से घर में चल रहे ज्ञानमंदिर स्कूल पर छापा मारकर डीइओ कार्यालय के अधिकारियों ने स्कूल बंद करवा दिया। साथ ही अभिभावकों और विद्यार्थियों को बुलाकर संचालक से एलसी दिलवाया।
शहर में कई स्कूल शॉपिंग सेंटर और दुकानों में चल रहे हैं। इनमें मैदान नहीं हैं, आपातकाल में बाहर निकलने का रास्ता नहीं है। छोटी दुकानों और कमरों की कक्षाओं में भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ राजस्थान पत्रिका की ओर से अभियान चलाया गया। जिला शिक्षा अधिकारी और अभिभावकों को विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए जागरूक करने के लिए शुरू किए गए इस अभियान का असर यह हुआ कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। डिंडीली के ज्ञानविद्या मंदिर स्कूल पर शुक्रवार को डीइओ की टीम ने छापा मारा। यह स्कूल छोटे-से मकान में चलाया जा रहा था। घर में एक तरफ रसोई है तो दूसरी ओर छोटे-से कमरे में विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा था। मकान में जाने के लिए छोटा-सा रास्ता है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एज्यूकेशन इंस्पेक्टर अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में 10 अधिकारियों की टीम ने स्कूल पर कार्रवाई की। स्कूल में प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा था। स्कूल में सुविधाओं का अभाव और नियमों का पालन नहीं होने के कारण इसकी उच्चतर की मान्यता रद्द करने के लिए शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजी गई थी। शिक्षा विभाग ने एक साल पहले शैक्षणिक सत्र 2019-20 से स्कूल की उच्चतर माध्यमिक वर्ग की मान्यता को रद्द कर दिया था। फिर भी संचालक ने विद्यार्थियों को 9वीं और 10वीं में प्रवेश दिया।
विद्यार्थियों को दिलवाया एलसी
डीइओ के अधिकारियों ने शुक्रवार को स्कूल पर छापा मारा और जांच की तो स्कूल संचालकों की पोल खुली। अधिकारियों ने 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के कागज खोजे। फिर विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्कूल बुलाया गया। संचालकों से सभी को प्राथमिक वर्ग का एलसी दिलवाया गया, जिससे विद्यार्थी अन्य माध्यमिक स्कूल में प्रवेश ले सकें।

शिक्षा विभाग की उदासीनता पड़ रही है भारी
शहर में दुकानों और छोटे मकानों में चल रहे स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग जिम्मेदार है। 10 साल पहले नियमों में छूट का लाभ लेकर कई लोगों ने स्कूल की मान्याता ले ली और दुकानों में स्कूल खोल दिए। स्कूल के खिलाफ शिकायत होने पर जांच अधिकारी पहुंचते हैं, स्कूल में कमी पाए जाने पर रिपोर्ट तैयार की जाती है, रिपोर्ट में स्कूल बंद करने की सिफारिश की जाती है। शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजने के बाद उसके आदेश का इंतजार किया जाता है। आदेश नहीं आने तक स्कूल पर कार्रवाई नहीं हो पाती । शहर में ऐसे कई स्कूलों के खिलाफ रिपोर्ट भेजी गई है, लेकिन शिक्षा विभाग का आदेश नहीं मिलने के कारण स्कूलों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। रांदेर में संस्कार सरिता, अलथाण में टैगोर स्कूल, पांडेसरा में भगवती विद्यालय को बंद करने के लिए सूरत डीइओ कार्यालय से शिक्षा विभाग को सिफारिश की गई है। डीइओ कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वह शिक्षा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। आदेश मिलते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग से आदेश मिलने पर रांदेर के प्रभाततारा स्कूल, कतारगाम के महावीर विद्यालय और डिंडोली के ज्ञानमंदिर स्कूल पर कार्रवाई की गई।

धोखे में रखा संचालक ने
ज्ञानमंदिर स्कूल के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि स्कूल के पास मान्यता है या नहीं, इसके बारे में उन्हें पता नहीं था। संचालक ने बताया था कि उसके पास मान्यता है, इसलिए उसकी बात पर विश्वास कर प्रवेश ले लिया गया। अब जब कार्रवाई हुई तो पता चला कि संचालक ने उन्हें धोखे में रखा। प्रभाततारा स्कूल के संचालक ने भी अभिभावकों को धोखे में रख कर माध्यमिक में प्रवेश दिया था। कार्रवाई होने पर अभिभावकों को संचालकों के झूठ का पता चला था।

बंद किया जाएगा
जिन स्कूलों को जांच रिपोर्ट के आधार पर बंद करने का आदेश मिला है, उन्हें बंद करने की ठान ली गई है। नियमों के खिलाफ चल रहे स्कूलों के सभी प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की गई है। खामी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई कर स्कूल बंद कर दिया जाएगा।
अरुण अग्रवाल, एज्यूकेशन इंस्पेक्टर, डीइओ, सूरत