3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

SURAT SPECIAL NEWS: सूरत कपड़ा मंडी से दुनियाभर में 1900 करोड़ का यार्न निर्यात

- यार्न एक्सपो में दिखेगी कई विशिष्ट क्वालिटी :  

2 min read
Google source verification
SURAT KAPDA MANDI: टेक्सटाइल मार्केट्स में रेंट 70 फीसद से अधिक रिवाइज्ड

SURAT KAPDA MANDI: टेक्सटाइल मार्केट्स में रेंट 70 फीसद से अधिक रिवाइज्ड

सूरत. टेक्सटाइल सिटी सूरत वस्त्र निर्यात तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि यार्न निर्यात में अपनी कई विशिष्ट खुबियों के साथ आगे बढ़ रहा है। बेहतर क्वालिटी के यार्न उत्पाद में सूरत कपड़ा मंडी के बढ़ते कदमों का ही परिणाम है कि दुनियाभर में सूरत से सालाना 1900 करोड़ का यार्न निर्यात किया जाने लगा है। चेम्बर ऑफ कॉमर्स के जीएफआरआरसी (ग्लोबल फेब्रिक्स रिसॉसेज एंड रिसर्च सेंटर) ओर से स्थानीय यार्न उत्पाद को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय यार्न एक्सपो का आयोजन भी 4 अगस्त शुक्रवार से सरसाना स्थित कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है।

एमएमएफ (मेनमेड फाइबर) के क्षेत्र में सूरत में विपुल संभावनाओं को भांपकर स्थानीय कपड़ा उद्यमियों ने इस दिशा में व्यापार को बढ़ाया। उन्हें इस कार्य में चेम्बर ऑफ कॉमर्स के जीएफआरआरसी ने यार्न एक्सपो के माध्यम से भरपूर सहयोग किया है। एग्जीबिशन में सूरत ही नहीं देशभर के यार्न उत्पादक भाग लेंगे। सूरत सभी तरह के फेब्रिक्स एवं गारमेंट्स का बड़ा केंद्र बन गया है। यहां पर देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई ब्रांड ने अपनी जगह सूरत में बनाई है। तीन दिवसीय यार्न एक्सपो में यार्न की कई नई क्वालिटी देखने को मिलेगी जो बाद में देश व दुनिया में पहुंचेगी।

- इनकी दिखेगी खासियत :

यार्न एक्सपो में यार्न के कई नए उत्पाद इस बार कपड़ा उद्यमियों को देखने को मिलेंगे। इनमें नेचुरल प्रॉडक्ट के साथ हाईब्रिड यार्न, कॉटनवुल, सिल्क लिनेन, रेमिक, शत-प्रतिशत रिसाइकल यार्न, बांबू यार्न, ग्रेनाइट यार्न, हेम्प यार्न, लाइका, कान के अलावा पॉलिस्टर, नायलोन, विस्कॉस, एंटी बैक्टिरियल आदि शामिल रहेगी। वहीं, स्प्रीम यार्न, मिस्ट्री यार्न, बीम यार्न आदि विशेष क्वालिटी के उत्पाद भी खास तौर पर शामिल रहेंगे।

-250 मिलियन डॉलर का एमएमएफ यार्न निर्यात :

देशभर के यार्न निर्यात का 30 प्रतिशत एक्सपोर्ट सूरत से होता है। इस वर्ष 250 मिलियन डॉलर याने 1900 करोड़ का मेनमेड फाइबर यार्न निर्यात किया गया। वहीं, सोरोना यार्न जो कि अभी तक चीन में ही तैयार होता था और आयात किया जाता था। अब वह सूरत में भी तैयार होने लगा है। इतना ही नहीं सूरत में दो प्लाई यार्न (डबल यार्न) का उत्पादन भी कपड़ा उद्यमी करने लगे हैं।

-अगले 10 साल खूब बेहतर

आगामी समय टेक्सटाइल के लिए स्वर्णिम युग कहा जा सकता है। भारत में श्रम लागत, औसत उम्र, जनसंख्या व भौगोलिक परिस्थिति सभी मायने में चीन, कोरिया से काफी कम है। ऐसी स्थिति में स्किल्ड वर्कर तैयार कर कपड़ा उद्योग के सभी क्षेत्र में नए-नए उत्पाद को बढ़ावा देकर अगले 10 साल में सूरत के कपड़ा उद्योग को बहुत ऊंचाई तक ले जाना संभव है।

गिरधरगोपाल मुंदड़ा, चेयरमैन, जीएफआरआरसी व यार्न एक्सपो

Story Loader