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थक गए सीए लेकिन ढूंढने से भी नहीं मिल रहा करदाता का नाम,

इनकम टैक्स के चालान में नाम नहीं होने से दिक्कतसीए और अधिकारियों की मशक्क्त बढ़ गई
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सूरत

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Pradeep Devmani Mishra

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Updated: 13 Apr 2018, 9:22 PM IST

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सूरत

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स ने करदाताओं की प्राइवेसी बनाए रखने के लिए आयकर के चालान पर करदाता के नाम नहीं बताने का फैसला किया है। इसके कारण करदाताओं, सीए और आयकर अधिकारियों की दिक्कत बढ़ रही है।
पहले जो करदाता आयकर ऑनलाइन जमा करते थे, उन्हें मिलने वाले चालान पर उनका पैन कार्ड नंबर और पूरा नाम होता था। नए नियमों के अनुसार ऑनलाइन टैक्स पेमेंट करने पर पैन कार्ड नंबर तो पूरा रहता है, लेकिन करदाता के नाम के शुरू के कुछ शब्द ही होते हैं। इससे करदाता का नाम स्पष्ट नहीं हो पाता। सीए का कहना है कि नए नियमों के कारण परेशानी बढ़ गई है। आधे-अधूरे नाम के कारण यह पता नहीं चलता कि किस करदाता का टैक्स पेमेंट हुआ है। इसके लिए पैन कार्ड के माध्यम से जानकारी निकालनी पड़ती है। करदाता की तरफ से टैक्स चुकाने के बाद आयकर अधिकारी को भी चालान दिया जाता है। उसे भी करदाता का नाम जानने के लिए पैन कार्ड के माध्यम से जानकारी जुटानी पड़ती है। बड़ी संख्या में चालान होने से अधिकारियों का काफी समय इस काम में खर्च होता है।
सीए एस.के. काबरा का कहना है कि सरकार ने कई कारणों से करदाता के नाम गुप्त रखने का फैसला किया है, लेकिन इससे करदाताओं, सीए और आयकर अधिकारियों की दिक्कत बढ़ गई है। करदाताओं का नाम पता करने के लिए बार-बार पैन कार्ड का सहारा लेना पड़ता है। समय बर्बाद होता है और फाइलिंग में दिक्कत आती है।
सर्च के दौरान ही मिल्कियत अटैच

आयकर विभाग के नए नियमों के अनुसार सर्च के दौरान यदि आयकर अधिकारी को बड़ी रकम की टैक्स चोरी पकड़े जाने की आशंका हो तो वह मकान समेत अन्य स्थिर संपत्ति सर्च के दौरान ही अटैच कर सकते हैं। पहले आयकर के नियम 281-बी के तहत आयकर अधिकारी एसेसमेंट के बाद संपत्ति अटैच कर सकते थे, लेकिन नए नियम 132-9-बी के अनुसार सर्च के दौरान ही अधिकारी संपत्ति अटैच कर लेंगे।

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