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गणपति महोत्सव की पूर्णाहुति आज

प्रतिमाओं का होगा विसर्जन

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गणपति महोत्सव की पूर्णाहुति आज

सिलवासा. संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली मे गणपति महोत्सव की पूर्णाहुति रविवार को प्रतिमा विसर्जन के साथ हो जाएगी। विसर्जन की सभी तैयारियां पंडालों में मंडलों ने पूरी कर ली है। विसर्जन के दौरान सुरक्षा व यातायात प्रबंधन को लेकर पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए है।
अनंत चतुर्दशी पर शहर के सभी वार्ड से रविवार को गणपति की सवारी निकलेगी। पिपरिया गणेश मंडलम् एवं सिद्धिविनायक मित्र मंडल के पंडालों में दोपहर को विसर्जन यात्रा से पूर्व गणेश पूजन होगा। विसर्जन के लिए छोटे-बड़े कुल मिलाकर एक दर्जन वाहनों को सजाया गया है। विसर्जन यात्रा आकर्षक बनाने के लिए गणेश मंडलम् ने केरला से कलाकारों की टीम बुलाई है। आयोजकों ने बताया कि पिपरिया के राजा की विसर्जन यात्रा बैंड-बाजे एवं ढोल-नगाड़े के साथ दोपहर दो बजे रवाना होगी। विसर्जन यात्रा में नृत्य कलाकारों के साथ संगीत, भक्ति गीत, प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। विसर्जन यात्रा पिपरिया से सचिवालय रोड, झंडा चौक, पुलिस थाना, शहीद चौक, प्रमुख विहार से होती हुई दमणगंगा तट तक जाएगी। नदी में मूर्ति विसर्जन के लिए क्रेन की सेवा ली जाएगी। शहर के अन्य पंडालों से भी दोपहर बाद विसर्जन यात्रा निकलेगी। रविवार को करीब 200 से अधिक मुर्तियों का विसर्जन होगा। विसर्जन के दौरान पुलिस विभाग ने शहीद चौक से अथाल ब्रिज तक एक और वाहनों के आवागमन की व्यवस्था की है। थानाधिकारी केबी महाजन ने बताया कि विसर्जन के दौरान शहर मेेंं भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।


पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़


गणेश उत्सव समाप्ति से पूर्व शनिवार को पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। पंडाल में श्रद्धालुओं ने विघ्नविनायक गणराज को मनाने के लिए सभी तरह की पूजा विधि सम्पन्न की। वहीं, गणेश युवा मंडल के पंडाल में रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया।


घाट पर रखा कलश


डॉ. श्रीनाना साहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान ने दमणगंगा नदी में विसर्जन के लिए गणेश मुर्तियों पर फूल माला व पूजन सामग्री को नदी में प्रवाहित करने के बजाय अलग रखने के लिए निर्माल्य कलश रखा है। कलश अथाल ब्रिज के दोनों ओर रखे गए हैं।


हजार से ज्यादा प्रतिमाएं विसर्जित


गणपति महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने अलग-अलग दिन के लिए स्थापित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन पूर्व में किया और इनकी संख्या एक हजार से ज्यादा बताई गई है। विसर्जित प्रतिमाओं से दमणगंगा नदी पर बने रिवरफ्रंट किनारे निर्मित कुंड अटा है।