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VNSGU : कॉलेज ज्ञान का उपयोग स्वयं के लिए नहीं राष्ट्र निर्माण के लिए करें : राज्यपाल

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में सोमवार को वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (वीएनएसजीयू) VNSGU का 55वां दीक्षांत समारोह का हुआ। शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और तैत्तिरीय उपनिषद के छंदों के साथ समारोह की शुरुआत की गई। इस अवसर पर डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि कॉलेज में प्राप्त ज्ञान का उपयोग स्वयं के लिए नहीं राष्ट्र निर्माण के लिए करें।

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VNSGU : कॉलेज ज्ञान का उपयोग स्वयं के लिए नहीं राष्ट्र निर्माण के लिए करें : राज्यपाल

VNSGU : कॉलेज ज्ञान का उपयोग स्वयं के लिए नहीं राष्ट्र निर्माण के लिए करें : राज्यपाल

वीएनएसजीयू VNSGU के कन्वेंशन हॉल में सोमवार को 55वां दीक्षांत समारोह हुआ। राज्यपाल आचार्य देवव्रत का अयोध्या में नवनिर्मित भगवान श्री राम के भव्य मंदिर की प्रतिकृति भेंट कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर राज्य शिक्षा मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया, कुलपति डॉ.केएन चावड़ा, कुलसचिव डॉ.आरसी गढ़वी और परीक्षा नियामक डॉ.एवी धडुक के साथ सभी 12 संकाय के डीन, सिंडीकेट व सीनेट सदस्य उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में 96 पाठ्यक्रम के 17,375 विद्यार्थियों को डिग्री, 81 को पीएचडी व 4 को एमफील की उपाधि दी गई। साथ ही 146 विद्यार्थियों को मेडल से सम्मानित किया गया। संस्कृत पाठशाला के 11 ऋषि कुमारों ने शंखनाद और 10 भूदेवों ने वैदिक मंत्रों व तैत्तिरीय उपनिषद के श्लोकों के साथ भारतीय संस्कृति की प्राचीन गुरुकुल परंपरा को प्रकट किया।

- गुजरात महापुरुषों की धरती :
इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा में भी ऋषि-मुनि अपने शिष्यों को शिक्षा-दीक्षा देकर 'सत्यं वद धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः' का अनुसरण करने को कहते थे। जिसका मतलब सत्य बोलने, धर्म का आचरण करने और पढ़ाई में आलस्य न करने की शिक्षा-दीक्षा देते थे। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि विश्व शांति की हत्या करने वाले कुछ आतंकियों के पास भी ऊंची डिग्री है, लेकिन उन्होंने आतंक का रास्ता चुना है। इसलिए शिक्षा का मूल्य आधारित, सभ्य और समाज के प्रति जिम्मेदार होना जरूरी है। मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव:, आचार्य देवो भव: और अतिथि देवो भव: के संस्कृति भावों को जीवन में उतारना चाहिए। गुजरात सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी, अखंड भारत के निर्माता सरदार वल्लभ भाई पटेल, समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती और वीर नर्मद जैसे महापुरुषों की धरती है। देश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लिए काम कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी गुजरात की धरती के पुत्र हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कॉलेज में प्राप्त ज्ञान का उपयोग स्वयं के लिए नहीं राष्ट्र निर्माण के लिए करें।
- शारीरिक व मानसिक रूप से बने मजबूत :
शिक्षा राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि व्यक्तिगत करियर के लिए शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। सिर्फ पैसा कमाने की उम्मीद करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि प्राप्त ज्ञान का समाज की भलाई के लिए सार्थक उपयोग करना भी जरूरी है। विद्यार्थियों से अनुरोध किया गया कि वे बहु-प्रतिभाशाली व्यक्तित्व को विकसित करें और व्यायाम के माध्यम से शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनें।
- 17,375 डिग्रियां डिजिलॉकर :
55वें दीक्षांत समारोह में दी गई सभी 17.375 डिग्रियां डिजिलॉकर में उपलब्ध होगी। विद्यार्थी लॉगइन आईडी की सहायता से इसे एक्सेस कर पाएंगे। राज्यपाल ने रिमोट के माध्यम से नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी में डिजिटल प्रणाली से सभी डिग्रियों को डिपॉजिट किया।
- मरणोपरांत पीएचडी की उपाधि :
बरफीवाला कॉलेज के स्व.प्रोफेसर मोहितकुमार प्रकाशचंद्र पटेल को मरणोपरांत पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनके जुड़वां बेटों तीर्थ और तथ्य को राज्यपाल ने उपाधि दी। कुलपति डाॅ.केएन चावड़ा के मार्गदर्शन में स्वर्गीय मोहितकुमार वर्ष 2020 से प्लास्टिक विषय पर पीएचडी की पढ़ाई कर रहे थे। शोध पूरा करने के बाद पीएचडी की थीसिस भी तैयार हो गई थी। अचानक ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनकी मृत्यु हो गई। विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने उन्हें मरणोपरांत पीएच.डी. की उपाधि देने का निर्णय किया था।
- हासिल किए तीन गोल्ड मेडल :
भरूच निवासी 23 वर्षीय सरस्वती राठौड़ ने संस्कृत भाषा में एमए की डिग्री हासिल करने के साथ तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। सरस्वती ने बताया कि परिवार में उच्च शिक्षा हासिल करने वाली पहली और एकमात्र लड़की है। उनका लक्ष्य सरकारी स्कूल में शिक्षक बनकर बच्चों को संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। 10वीं कक्षा के बाद संस्कृत भाषा के प्रति रुझान बढ़ने के कारण इस विषय में उच्च अध्ययन किया।

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