सूरत. वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (वीएनएसजीयू) प्रशासन पर अब ऑडिट टेंडर को लेकर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में सीनेटर ने राज्यपाल से शिकायत की है। शिकायत के आधार पर राज्यपाल की ओर से गुजरात सरकार शिक्षा विभाग सचिव को जांच के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन टेंडर और मूल्यांकन में गड़बड़ी मामले में भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
वीएनएसजीयू में इस बार ऑडिट टेंडर को लेकर विवाद हुआ है। सीनेटर भावेश रबारी ने आरोप लगाया है कि वीएनएसजीयू के ऑडिट के लिए मार्च 2023 में टेंडर जारी किए गए थे। इसमें 11 कंपनियों ने ऑडिट करने के लिए टेंडर भरे थे। सिंडिकेट की बैठक में 11 कंपनियों को इस टेंडर के लिए योग्य तय किया गया। बाद में पांच कंपनियों को ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसके बाद लोवेस्ट प्राइज जाने बिना ही दो कंपनियां होड़ में रही। एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अवगणना कर उसे टेंडर दे दिया गया।
- पहले ही लाखों का कर भरने का मिला है नोटिस :
सीनेटर ने यह भी आरोप लगाया है कि जिस कंपनी को टेंडर दिया गया है, उस कंपनी की ऑडिट में कई गड़बड़ी हुई थी। इन गड़बड़ी के कारण वीएनएसजीयू को लाखों के कर चुकाने का नोटिस भी मिला हुआ है। फिर भी ऑडिट में गड़बड़ी करने वाली कंपनी को ठेका दिया गया है। इस प्रकार वीएनएसजीयू प्रशासन ने ऑडिट के टेंडर को लेकर भ्रष्टाचार किया है। इसलिए राज्यपाल से इस मामले की शिकायत की गई।
- दो माह में तीसरे मामले की होगी जांच :
वीएनएसजीयू पर दो माह में यह तीसरी बार राज्यपाल ने जांच का आदेश दिया है। इससे पहले उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पुणे की कंपनी को दिए गए ठेके में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। इस मामले में राज्यपाल ने जांच का निर्देश दिया है। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं के ऑनलाइन मूल्यांकन में हुई गलतियों के कारण हजारों विद्यार्थियों के परिणाम में गड़बड़ी हुई थी। इस मामले की जांच भी शिक्षा सचिव को सौंपी गई है।
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