गुआक्टा
के अध्यक्ष डाॅ. राजेश चंद्र मिश्र बताते हैं कि काॅलेजों में शोध
व्यवस्था है ही नहीं। विवि तक ही शोध कार्य सीमित है। ऐसे में काॅलेज
शिक्षक को अंक जुटाने में परेशानी होती है। श्री मिश्र कहते हैं कि
पदोन्नति के लालच में शिक्षक शिक्षण कार्य छोड़कर प्वाइंट जुटाने के लिए
सारी एनर्जी खर्च करेगा। वह पढ़ाने की बजाय एनएसएस, परीक्षा, प्रवेश जैसे
कार्याें में अपना सारा ध्यान केंद्रित करेगा। गुआक्टा के मंत्री डाॅ. एसएन
शर्मा बताते हैं कि अगर प्राचार्य खुश है तो शिक्षक को कमेटी में शामिल
करेगा और नहीं किया तो प्वाइंट कम हो जाएगा। इससे गुटबाजी बढ़ेगी और
काॅलेजों में माहौल भी खराब होगा। इसलिए एपीआई किसी भी सूरत में शिक्षक हित
के लिए ठीक नहीं।