घुंघरु, मृदंग और नल की ध्वनि ने यह बात साबित कर दी है कि हमारे लोकगीत में कितनी क्षमता होती है। दूरदर्शन के कलाकार युगल किशोर सिंह ने भोजपुरी, भजन, दादरा, चैता एवं कजरी प्रस्तुत करके सबको खुश कर दिया। मध्य प्रदेश इंदौर से आयी श्रीमती अंजना सक्सेना के स्वरांगिनी समूह के कलाकारों ने कबीर अमृत वाणी की प्रस्तुति करके आयोजन की सार्थकता साबित कर दी। स्कार्ड्स सृजन कला मंच के कलाकारों ने मूक अभिनय और हास्त अभियन से दर्शको को भरपूर मनोरंजन किया। साथ ही शिक्षा के प्रति जागरूकता का भी संदेश दिया। किसानो की आत्महत्या और किसानो का मौन विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि किसानों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं देता है। किसानों के पास इतनी समस्या होती है कि परेशान होकर वह आत्महत्या कर लेते है। प्राकृतिक आपता से जो राहत राशि मिलती भी है वह इतनी कम होती है कि किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। वक्ताओं ने कहा कि कृषि के लिए लोन तो मिलता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया इतनी लम्बी है कि किसान लोन लेने का कोरम तक पूर्ण नहीं कर पाता है। वक्ताओं ने कहा कि देशवासियो का पेट किसान भरते है, लेकिन सारी सुविधा उद्योगपति को मिलती है। वक्ताओं ने कहा कि विकास की आड़ में कृषि भूमि का अतिक्रमण करने की बजाए अन्य विकल्प तलाशना चाहिए। समारोह के अंत में दशरथ मांझी फिल्म को दिखाया गया, जिससे लोगों को बताया गया कि यदि हौसले की उड़ान होती है तो सफलता की मंजिल अवश्य मिल जाती है। फीचर फिल्म दो बीघा जमीन दिखा कर देश में किसानों की व्यथा को समाज तक पहुंचाया गया। गोष्ठी में प्रो.सोमनाथ त्रिपाठी, दिवेंद्र सिंह, डा.राजीव श्रीवास्तव, अरविंद मूर्ति आदि ने विचार व्यक्त किया। संचालन सुनील दत्ता व धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने किया।