
शाजापुर.
जंगलविहीन जिले में दुर्लभ काले हिरणों (कृष्ण मृग) की तादाद तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते इनको रहने के लिए उपयुक्त और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश का पहला कंजर्वेशन सेंटर जिले में तैयार होगा। प्रयोग बतौर पहले यह 25 हेक्टेयर में बनेगा। प्रयोग सफल रहा तो फिर विस्तार होगा।
काले हिरण की जिले के राजस्व क्षेत्र में संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके चलते इनके शिकार की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जिले के शुजालपुर और कालापीपल क्षेत्र में ये हिरण बहुतायत में हो गए हैं और फसलों को नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। इसके चलते वन विभाग ने इनको संरक्षित करने के लिए प्लान बनाया है। इसमें ब्लैक बग कंजर्वेशन एरिया (काला हिरण सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र) निर्माण का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है।
175 हेक्टेयर में बनाएंगे
प्रस्ताव के तहत जेठड़ा जोड़, डुंगलाय, मगरानिया, डाबरी और ढाबला घोंसी सहित अन्य ग्रामों में भूमि का चयन किया है। इन क्षेत्रों में कुल 175 हेक्टेयर जमीन उपयुक्त है। इस क्षेत्र में कंजर्वेशन सेंटर के लिए शासन स्तर से मंजूरी भी मिल गई है। पहले चरण में जेठड़ा जोड़ पर 25 हेक्टेयर भूमि पर कंजर्वेशन एरिया का निर्माण होगा। 36 लाख रुपए की लागत से तार फेंसिंग कर प्राकृतिक वातावरण बनाया जाएगा। यहां हिरणों के खाने के लिए चारा और पानी की पर्याप्त व्यवस्था होगी, ताकि वे भोजन की तलाश में बाहर न जाएं। 2-3 साल में तार फेंसिंग पूरी हो जाएगी।
5 फीट रहेगी ऊंचाई : कंजर्वेशन एरिया में पांच फीट ऊंची तार फेंसिंग की जाएगी। वन विभाग के अनुसार जब हिरणों को खाने और पानी की उपयुक्त व्यवस्था मिलेगी तो वे स्वयं ही यहां आने लगेंगे। विभाग के अनुसार पांच फीट की ऊंचाई काले हिरण आसानी से कूद सकते हैं, वहीं दूसरे जानवरों को इतनी ऊंचाई कूदने में परेशानी होती है।
इसलिए जरूरत
दुर्लभ काले हिरणों के साथ अन्य हिरणों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में इनके रहने के लिए प्राकृतिक आवास जरूरी है। एक ओर जिले में जंगल नहीं हैं, इस कारण हिरण कई बार खेत-खलिहानों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस कारण हिरणों के लिए पहले अभयारण्य के प्रयास किए गए, लेकिन जगह कम पडऩे के कारण अब कंजर्वेशन एरिया की प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रदेश में पहली बार होगा नीलगाय का बंधियाकरण
शाजापुर. नीलगाय की संख्या पर नियंत्रण के लिए प्रदेश में पहली बार वन विभाग उनका बंधियाकरण करेगा। वन विभाग शाजापुर के एसडीओ राकेश लहरी ने बताया कि नीलगाय की आबादी पर नियंत्रण के लिए प्रस्ताव बनाए थे। इनमें सबसे कारगर प्रस्ताव बंधियाकरण का आया है। वन विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को प्रदेश स्तर से अनुमति मिल गई है। जबलपुर के विशेषज्ञ अखिलेश मिश्रा व टीम ने वस्तुस्थिति का जायजा लेकर रिपोर्ट बनाई है। 5 नर नीलगाय का बंधियाकरण कर उनकी निगरानी की जाएगी। प्रयोग सफल रहा तो और भी नीलगाय का बंधियाकरण होगा। जिले में करीब एक हजार नीलगाय हैं।
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