वैसे तो पतंग हर मौसम उड़ती है। लेकिन मकर संक्रांति के मौके पर आसमान में रंग बिरंगी पतंगों की बाढ़ सी आ जाती है। फर्क सिर्फ इतना है कि इन पतंगों को उड़ान के लिए लोगों ने पारंपरिक सूती मांझा की जगह चायनीज मांझे को अपना लिया है। जबकि इसी मांझे की चपेट में आने से बीते 15 सितंबर को परमानतपुर मोहल्ले के एक बालक की मौत हो चुकी है। स्कूल जाती एक छात्रा का गला कट चुका है तो बिजली विभाग के एक जेई को इसी मांझे ने अस्पताल पहुंचा दिया है। इतना ही नहीं चायनीज मांझे पक्षियों के लिए भी मौत का सामान बन चुके हैं। फिर भी चायनीज मांझे की बिक्री नहीं रूक रही है। हालांकि जिला प्रशासन की मानें तो चायनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह से बंद कर दी गई है। प्रशासन ने अभियान चलाकर चायनीज मांझे की बिक्री पर नकेल भी लगाई थी। लेकिन मकर संक्रांति के मौके पर होने वाली चायनीज मांझे की डिमांड को देखते हुए कारोबारियों ने पहले से मांझा दुकान से हटाकर रख लिया है। दुकानदारों को भी उम्मीद है कि मकर संक्रांति के बाद तक चोरी छिपे सही लेकिन बिक्री जोरों पर रहेगी। सिटी मजिस्ट्रेट उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिले में चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कई बार दुकानों पर छापेमारी कर मांझा जब्त किया गया है। अगर किसी दूकान पर चाइनीज मांझा बिक रहा हो तो उसकी सूचना प्रशासन को दी जाए। दुकानदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।