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श्री बैजनाथ महादेव मंदिरः दर्शन मात्र से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

किवंदती के अनुसार कोई तपस्वी बैजनाथ महादेव मंदिर को अपने तपोबल से उड़ाकर ले जा रहा था, किंतु सूर्योदय होने से उसे यही उतरना पड़ा

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Gwalior Online

Aug 10, 2015

Baijnath Mahadev temple

Baijnath Mahadev temple

सावन में सोमवार को हर तरफ बोल बम बम...बोल बम... हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। भगवान भोलेनाथ की भक्ति के प्रमुख माह सावन में शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। शिवालयों में प्रतिदिन पूजा-अर्चना के साथ-साथ अभिषेक अनुष्ठान हो रहे हैं

मंदिर का इतिहास

नगर के प्रवेश द्वार पर स्थित श्री बैजनाथ महादेव मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ था। इसे परमारकालीन समय में बनाया गया था। यह मंदिर 1984 से पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। 64 फीट ऊंचाई लिए यह मंदिर जितना बाहर से मनमोहक है, उतना ही अंदर से भी भव्य है। एक किवंदती के अनुसार कोई तपस्वी इसे अपने तपोबल से उड़ाकर कहीं ले जा रहा था, किंतु सूर्योदय होने से उसे मंदिर को यहीं पर उतरना पड़ा। संभवत: इसी कारण सामान्य तौर पर इसे उड़निया मंदिर भी कहा जाता है।



पूरी होती है सबकी मनोकामना


मंदिर में पूजा का अत्यंत महत्व है। शिवजी को प्रसन्न करके मनोवांछित फल पाने के लिए हर श्रद्धालु उत्सुक रहता है। शिवलिंग के दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामना पूरी होती है। सावन में प्रतिदिन श्रद्धालु सुबह से मंदिर आकर भगवान शिव का अभिषेक, पूजन करके दोष निवारण भी करते हैं।




श्रद्धालुओं की आस्था


हर साल चैत्र पक्ष की अमावस्या पर नगर परिषद द्वारा मेला लगाया जाता है। सावन माह में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। सोमवार को भगवान भोलेनाथ का विशेष शृंगार और अभिषेक किया जाता है। विशिष्ट अवसरों पर भांग और पंचमेवा, अक्षत, मावा, पुष्प-बिल पत्र आदि से शृंगार होता है। मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश, सूर्यचक्र ध्वजा दंड की प्रतिष्ठा 2008 को की गई थी। मंदिर में गणेशजी, कार्तिकेय और कुबेर देवता तथा नंदी की प्राण-प्रतिष्ठा भी की गई। यह आयोजन श्री बैजनाथ भक्त मंडल और जनसहयोग से किए गए थे।




ऐसे पहुंचे महादेव मंदिर


जिला मुख्यालय से 50 दूरी पर स्थित बदनावर है। जहां मंदिर बस स्टैंड से एक किमी की दूरी पर महू-नीमच फोरलेन मार्ग स्थित हैं। यहां पहुंचने के लिए बस या निजी साधन का सहारा लेना पड़ेगा।



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