2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

500 साल पुराने इस मंदिर में पूरी होती है नौकरी की मन्नतें, भक्तों का लगा रहता है तांता

500 साल पुराने इस मंदिर में पूरी होती है नौकरी की मन्नतें, भक्तों का लगा रहता है तांता
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

Tanvi Sharma

•

Updated: 3 Jan 2019, 6:34 PM IST

chilkur balaji

अच्छी नौकरी और विदेश जाना हर व्यक्ति जाना चाहता है। लेकिन ये तमन्ना हर इंसान की पूरी नहीं होती। कुछ लोगों की अधूरी रह जाती है। पर शायद आपको यह नहीं पता की आपकी यह तमन्ना मंदिर में पूरी की जाती है। जी हां, हैदराबाद से करीब 40 किमी दूर एक मंदिर ऐसा अनोखा मंदिर है जहां बेरोजगार अपनी नौकरी की तमन्ना लेकर आते हैं। इसके अलावा में लोग वीजा दिलाने की प्रार्थना के लिए भी आते हैं। मान्यताओं के अनुसार यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।

जिस अनोखे मंदिर की हम बात कर रहे हैं वह मंदिर हैदराबाद की सीमा से लगभग 40 किमी दूर स्थित चिल्कुर बालाजी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर में लोग चढ़ावे के रुप में हवाई जहाज चढ़ाते हैं। लोगों का कहना है की यहां हवाई जहाज़ चढ़ाने से वीजा मिलना आसान हो जाता है। दर्शानार्थी बताते हैं की वीज़ा के लिए दूतावास के चक्कर लगाने से अच्छा है चिल्कुर बालाजी मंदिर में आ जाएं। जल्द ही आपके वीजा बनने में आ रही सारी रुकावटें हट जाएगी। अगर आप को भी कई महीनों से वीजा नहीं मिल रहा है तो आन्ध्र प्रदेश स्थित चिल्कुर बालाजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर लिजिए।

नौकरी भी दिलाते हैं चिल्कुर बालाजी

चिल्कुर बालाजी को वीजा वाले बालाजी के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राचीन मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। इस मंदिर में लोग नौकरी की मन्‍नतें लेकर भी आते है और उनकी मनोकामना जल्दी पूरी भी हो जाती है। लोक कथाओं के अनुसार वेंकटेश बालाजी के एक भक्त हर रोज़ कई किलोमीटर चलकर तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए जाते थे। एक दिन अचानक उनकी तबियत खराब हो गयी और वे मंदिर नहीं जा पाए। इस दौरान बालाजी ने खुद भक्त को सपने में आकर दर्शऩ दिए और बोले कि इतनी दूर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, मैं यहीं तुम्हारे पास इस जंगल में रहता है। अगले दिन जंगल में उसी जगह पर मूर्ति की स्थापना की गई। वह मंदिर आज चिल्कुर बालाजी के नाम से जाना जाता है।