ये हैं न्याय के देवता, भक्त मन्नत के लिए भेजते हैं चिट्ठियां और चढ़ाते हैं घंटी व घंटे

यहां हर फरीयादी को मिलता है इंसाफ...

By: दीपेश तिवारी

Updated: 04 Apr 2020, 01:55 PM IST

आपने कई मंदिरों को लेकर आपने अनेक चमत्कारी बातें सुनी होंगी, जैसे कहीं मन्नत पूरी होती है, तो कहीं दर्शन मात्र से भक्तों के भाग्य चमक जाता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां जाकर भक्तों को न्याय की प्राप्ति होती है, यहां विराजित देवता को न्याय का देवता भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार जिनको कहीं न्याय नहीं मिलता, उन्हें इस मंदिर के देवता की शरण में आकर न्याय मिल जाता है।

इस मंदिर की सबसे खास बात ये हैं कि यहां मौजूद देवता से लोग जहां एक ओर न्याय की गुहार लगाते हैं, वहीं इस मंदिर की मान्यता ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों तक में है। वहीं मान्यता के अनुसार यहां देवता से गुहार लगाने पर किसी भी तरह के अन्याय की स्थिति में भक्त को न्याय हर तरह से मिल ही जाता है।

दरअसल ऋग्वेद में उत्तराखंड को देवभूमि कहा गया है। ऐसी भूमि जहां देवी-देवता निवास करते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस सबसे पावन क्षेत्र को मनीषियों की पूर्ण कर्म भूमि कहा जाता है।

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उत्तराखंड में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। इन मंदिरों की प्रसिद्धि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। इन्हीं में से एक मंदिर गोलू देवता का भी है। गोलू देवता को स्थानीय मान्यताओं में न्याय का देवता कहा जाता है।

गोलू देवता अपने न्याय के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं। हालांकि, उत्तराखंड में गोलू देवता के कई मंदिर हैं, लेकिन इनमें से सबसे लोकप्रिय और आस्था का केंद्र अल्मोड़ा जिले में स्थिति चितई गोलू देवता का मंदिर है। इस मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और लगातार गुंजती घंटों की आवाज से ही गोलू देवता की लोक प्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गोलू देवता

इस मंदिर में प्रवेश करते ही यहां अनगिनत घंटिया नज़र आने लगती हैं। यहां कई टनों में मंदिर के हर कोने कोने में देखने वाले इन घंटे घंटियों की संख्या कितनी है , ये आज तक मंदिर के लोग भी नहीं जान पाए।

ये हैं मान्यताएं:
गोलू देवता को स्थानीय संस्कृति में सबसे बड़े और त्वरित न्याय के देवता के तौर पर पूजा जाता है। इन्हें राजवंशी देवता के तौर पर पुकारा जाता है। गोलू देवता को उत्तराखंड में कई नामों से पुकारा जाता है। इनमें से एक नाम गौर भैरव भी है। गोलू देवता को भगवान शिव का ही एक अवतार माना जाता है। मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में घंटी चढ़ाई जाती है।

मनोकामना कभी अधूरी नहीं रहती
गोलू देवता को शिव और कृष्ण दोनों का अवतार माना जाता है। उत्तराखंड ही नहीं बल्कि विदेशों से भी गोलू देवता के इस मंदिर में लोग न्याय मांगने के लिए आते हैं। मंदिर की घंटियों को देखकर ही आपको इस बात का अंदाजा लग जाएगा कि यहां मांगी गई किसी भी भक्त की मनोकामना कभी अधूरी नहीं रहती।

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मन्नत के लिए लिखते हैं पत्र
मंदिर में लाखों अद्भुत घंटे-घंटियों का संग्रह है। इन घंटियों को भक्त मनोकामना पूरी होने पर ही चढ़ाते हैं। चितई गोलू मंदिर में भक्त मन्नत मांगने के लिए चिट्ठी लिखते हैं। इतना ही नहीं कई लोग तो स्टांप पेपर पर लिखकर अपने लिए न्याय मांगते हैं।

चितई गोलू मंदिर अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर है। यहां गोलू देवता का भव्य मंदिर है। मंदिर के अंदर सेफेद घोड़े में सिर पर सफेट पगड़ी बांधे गोलू देवता की प्रतिमा है, जिनके हाथों में धनुष बाण है। इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु न्याय मांगने के लिए आते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जिनको न्याय नहीं मिलता वो गोलू देवता की शरण में पहुंचते हैं और उसके बाद उनको न्याय मिल जाता है।

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चितई मंदिर में मनोकामना पूर्ण होने के लिए भक्तों के द्वारा अनेक अर्ज़िया लगायी जाती हैं, क्योंकि माना जाता है कि जिन्हें कही से न्याय नहीं मिलता है वो गोलू देवता की शरण में पहुंचते है और लोगों का मानना है कि ” गोलू देवता न्याय करते ही हैं।” क्युकी गोलू देवता को “ न्याय का देवता ” माना जाता है।

मंदिर का इतिहास...
जिला मुख्यालय अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर न्याय के देवता कहे जाने वाले गोलू देवता का मंदिर स्थित है, इसे चितई ग्वेल भी कहा जाता है | सड़क से चंद कदमों की दूरी पर ही एक ऊंचे तप्पड़ में गोलू देवता का भव्य मंदिर बना हुआ है। मंदिर के अन्दर घोड़े में सवार और धनुष बाण लिए गोलू देवता की प्रतिमा है।

उत्तराखंड के देव-दरबार महज देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना, वरदान के लिए ही नहीं अपितु न्याय के लिए भी जाने जाते हैं। यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक भगवान और शिव के अवतार गोलू देवता को समिर्पत है । ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के एक सेनापति ने 12वीं शताब्दी में करवाया था।

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एक अन्य कहानी के मुताबिक गोलू देवता चंद राजा, बाज बहादुर ( 1638-1678 ) की सेना के एक जनरल थे और किसी युद्ध में वीरता प्रदर्शित करते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके सम्मान में ही अल्मोड़ा में चितई मंदिर की स्‍थापना की गई।पहाड़ी पर बसा यह मंदिर चीड़ और मिमोसा के घने जंगलों से घिरा हुआ है। हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं।

यहां है ये मंदिर
गोलू मंदिर दिल्ली से 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप इस मंदिर के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो आपको आनंद विहार से सीधे अल्मोड़ा की बस मिलेगी। इसके अलावा आप पहले दिल्ली से हल्द्वानी भी जा सकते हैं और इसके बाद यहा से अल्मोड़ा के लिए गाड़ी ले सकते हैं।

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दीपेश तिवारी
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