शक्तिपीठों का महापीठ कामाख्या मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

शक्तिपीठों का महापीठ कामाख्या मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

Tanvi Sharma | Updated: 29 Sep 2019, 03:38:19 PM (IST) मंदिर

शक्तिपीठों का महापीठ कामाख्या मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

नवरात्रि में शक्ति के उपासक सभी लोग देवी मां दुर्गा व उनके नौं रूपों को पूजते हैं। इन नौं दिनों देशभर के सभी शक्तिपीठों में भक्तों का तांता लगा रहता है। वही शारदीय नवरात्रि ( Shardiya navratri ) भी प्रारंभ हो चुके हैं। इस मौके पर नवरात्रि के पहले दिन महापीठ कहलाने वाले कामाख्या मंदिर ( kamakhya mandir ) में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।

 

असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है।

 

शक्तिपीठों का महापीठ कामाख्या मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

मनोकामना पूरी करने के लिए यहां कन्या पूजन व भंडारा कराया जाता है। इसके साथ ही यहां पर पशुओं की बलि दी जाती ही हैं। लेकिन यहां मादा जानवरों की बलि नहीं दी जाती है।

काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या माता तांत्रिकों की सबसे महत्वपूर्ण देवी है। कामाख्या देवी की पूजा भगवान शिव के नववधू के रूप में की जाती है, जो कि मुक्ति को स्वीकार करती है और सभी इच्छाएं पूर्ण करती है।

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शक्तिपीठों का महापीठ कामाख्या मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

मंदिर परिसर में जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर आता है उसकी हर मुराद पूरी होती है। इस मंदिर के साथ लगे एक मंदिर में आपको मां का मूर्ति विराजित मिलेगी। जिसे कामादेव मंदिर कहा जाता है।

माना जाता है कि यहां के तांत्रिक बुरी शक्तियों को दूर करने में भी समर्थ होते हैं। हालांकि वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल काफी सोच-विचार कर करते हैं। कामाख्या के तांत्रिक और साधू चमत्कार करने में सक्षम होते हैं। कई लोग विवाह, बच्चे, धन और दूसरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कामाख्या की तीर्थयात्रा पर जाते हैं।

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शक्तिपीठों का महापीठ कामाख्या मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

कामाख्या मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है। पहला हिस्सा सबसे बड़ा है इसमें हर व्यक्ति को नहीं जाने दिया जाता, वहीं दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है। माना जाता है कि महीनें के तीन दिन माता को रजस्वला होता है। इन तीन दिनो तक मंदिर के पट बंद रहते है। तीन दिन बाद दुबारा बड़े ही धूमधाम से मंदिर के पट खोले जाते है।

इस जगह को तंत्र साधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगह मानी जाती है। यहां पर साधु और अघोरियों का तांता लगा रहता है। यहां पर अधिक मात्रा में काला जादू भी किया जाता ह। अगर कोई व्यक्ति काला जादू से ग्रसित है तो वह यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है।

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