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भारत का वो मंदिर जहां साक्षात् दर्शन देते हैं भगवान श्रीराम

पौराणिक कथाओं और हमारी सनातन परम्पराओं में हमें अक्सर देवी देवताओं के दर्शन की झलक देखने और सुनने को मिलती रही हैं। भगवान में आस्था रखने वाला हर मानव अपनी ज़िन्दगी में यह उम्मीद लगाता है कि इस कलयुग में भी भगवान के दर्शन हो जाएं...

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Rahul Mishra

Dec 21, 2016

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पौराणिक कथाओं और हमारी सनातन परम्पराओं में हमें अक्सर देवी देवताओं के दर्शन की झलक देखने और सुनने को मिलती रही हैं। भगवान में आस्था रखने वाला हर मानव अपनी ज़िन्दगी में यह उम्मीद लगाता है कि इस कलयुग में भी भगवान के दर्शन हो जाएं।

हम सभी भगवान राम के बारे में जानते ही हैं, भगवान् राम के विश्व में अनेक मंदिर हैं, लेकिन क्या आप उनके किसी ऐसे मंदिर के बारे में जानते हैं जहां वे साक्षात् दर्शन देते हैं. अगर नहीं, तो आइए हम आपको बताते हैं भगवान राम के एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां वो साक्षात् उपस्थित रहते हैं।

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में भगवान राम के साक्षात् दर्शन कराने वाले इस मंदिर का नाम “राजा राम मंदिर” है, इस जगह का नाम है ओरछा जोकि एक धर्मनगरी के रूप में भी प्रसिद्ध है।

संत तुलसीदास के समकालीन बने इस प्राचीन मंदिर के बारे में कई प्राचीन और पौराणिक घटनाओं का वर्णन है। इनमें से एक घटना उस स्थान के राजा मधुरक शाह और उनकी रानी गणेश कुंवर से जुड़ी हुई है। महारानी गणेश कुंवर एक रामभक्त महिला थी और उन्होंने अयोध्या की सरयू नदी के किनारे एक कुटिया बना कर कुछ समय तपस्या की थी।

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कहा जाता है कि उस समय संत तुलसीदास भी जीवित थे और उन्होंने रानी को आशिर्वाद भी दिया था। रानी को काफी समय तप करने के बाद भी भगवान राम के दर्शन नहीं हुए तो उन्होंने सरयू नदी में जल समाधि लेने का निश्चय किया और जल समाधी के लिए सरयू में कूद गई, पर उस समय सरयू की ही अटल गहराइयों में रानी गणेश कुंवर को भगवान राम ने दर्शन दिए, उस समय रानी ने भगवान को अपने साथ मध्य प्रदेश में ही रहने के लिए प्रार्थना की और उनकी प्रार्थना स्वीकार कर भगवान राम ने उनको ओरछा में साक्षात् सैदव रहने का वचन दिया था।

इस घटना के बाद ही रानी ने ओरछा में “राजा राम मंदिर” का निर्माण कराया, वहां श्रीराम की मूर्ति की प्रतिष्ठा कराई। कहा जाता है कि उस समय से ही इस मंदिर में भगवान राम सैदव प्रतिष्ठित रहते हैं। इस कलयुग में आज भी यहां बहुत से भक्त लोग भगवान राम के दर्शन कर अपने जीवन को कृतार्थ करते हैं।

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