
mahedevshal dham temple
क्या आपने कभी ऐसे किसी मंदिर के बारे में सुना है जहां खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है? निश्चित रूप से हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार टूटी हुई प्रतिमाओं को पूजास्थल से हटा दिया जाता है तथा उनकी पूजा नहीं की जाती परन्तु इस शिवलिंग का विशेष महत्व है।
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार झारखंड़ के गोइलकेरा में स्थित महादेवशाल धाम नामक यह मंदिर देश के जागृत मंदिरों में माना जाता है। कहा जाता है कि आजादी से पहले यहां रेल लाइन बिछाते समय एक ब्रिटिश इंजिनियर ने इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को उखाड़ने का प्रयास किया था। वह इसे उखाड़ तो नहीं पाया परन्तु यह खंडित कर दिया था। जिसकी कीमत उसे अपनी मौत के रूप में चुकानी पड़ी। मृत अंग्रेज इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी को भी पश्चिम रेलवे केबिन के पास दफना दिया गया। उसकी कब्र आज भी वहां पर मौजूद है।
ये है कहानी
आजादी के पहले एक ब्रिटिश इंजीनियर रॉबर्ट हेनरी गोइलकेरा के बड़ैला गांव में रेल लाइन बिछाने के लिए काम कर रहा था। खुदाई के दौरान ही मजदूरों को यहां शिवलिंग दिखाई दिया, जिस पर मजदूरों ने खुदाई रोक दी। मजदूरों के काम रोकने से गुस्साए रॉबर्ट ने फावड़े से शिवलिंग पर प्रहार किया जिससे शिवलिंग खंडित हो गया।
घटना के बाद जैसे रॉबर्ट हेनरी घर जाने लगा, उसकी रास्ते में ही मृत्यु हो गई। इस घटना से डरे अंग्रेजों ने रेल लाइन का ही रास्ता बदल दिया। बाद में वहां मौजूद ग्रामीणों ने खंडित शिवलिंग को देवशाल धाम नाम देकर पूजा शुरू कर दी। शिवलिंग के दूसरे खंडित हिस्से को मंदिर से लगभग दो किलोमीटर दूर रतनबुर पहाड़ी पर मां पाउडी के दरबार में स्थापित कर वहां पूजा शुरू कर दी। कहा जाता है कि इन दोनों ही स्थानों पर जो भी मांगा जाता है, वो पूरा होता है।
Published on:
31 Mar 2016 02:55 pm
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