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वृन्दावन के इस मंदिर में अंकित है कृष्ण के चरण चिन्ह

वृन्दावन के राधा दामोदर मंदिर में एक गिर्राज शिला रखी हुई है, इस शिला की चार परिक्रमा करने पर गिर्राज परिक्रमा का पुण्य तथा मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलता है

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Sunil Sharma

Nov 25, 2015

Girraj Shila at Radha Damodar temple

Girraj Shila at Radha Damodar temple

वृन्दावन के राधा दामोदर मंदिर में एक गिर्राज शिला रखी हुई है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अपने भक्त सनातन गोस्वामी को दिया था। सनातन गोस्वामी वृन्दावन से नित्य गोवर्धन पैदल जाते थे तथा वहां पर सप्तकोसी परिक्रमा कर वापस फिर वृन्दावन राधा दामोदर मंदिर में आ जाते थे। अत्यन्त वृद्ध होने पर एक बार जब वे थककर परिक्रमा मार्ग में बैठ गए तो ठाकुर जी साधारण मानव के रूप में उनके सामने प्रकट हो गए।

इस शिला पर स्वयं भगवान कृष्ण ने अंकित किए थे अपने चरण चिन्ह

उन्होंने वृद्धावस्था के कारण थके हुए सनातन से परिक्रमा न करने को कहा तो सनातन के अश्रुधारा बह निकली। इसके बाद ठाकुर के रूप में आए भगवान कृष्ण ने एक शिला उठाई। ज्योंही उन्होंने उस पर अपने चरणकमल रखे कि शिला मोम की तरह पिघल गई और उस पर उनके चरण कमल बन गए। इसके बाद वंशी बजाकर उन्होंने सुरभि गाय को बुलाया और उसका खुर उस पर रखकर उसका निशान अंकित कर दिया। श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी और लकुटी का चिन्ह अंकित कर वह शिला सनातन को दे दी तथा अपना विराट रूप दिखाया।



कृष्ण ने भक्त सनातन को कहा कि इस शिला को वहां रख दें जहां वृन्दावन में वह रहते हैं। इसकी चार परिक्रमा करने पर उनकी एक गिर्राज परिक्रमा हो जाएगी। यही शिला आज भी राधा दामोदर मंदिर वृन्दावन में रखी है तथा तड़के चार बजे से इस शिला की परिक्रमा शुरू हो जाती है। अधिक मास में जो लोग गोवर्धन की सप्तकोसी परिक्रमा नही कर पाते वे या तो इस मंदिर में या श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित गिर्राज मंदिर की चार परिक्रमा नित्य करते हैं तो उनकी एक परिक्रमा हो जाती है।


मलमास/ पुरुषोत्तम मास में गिर्राज शिला की परिक्रमा का है विशेष महत्व


गोवर्धन पीठाधीश्वर कृष्णदास कंचन महाराज ने अधिक मास के संबंध में शास्त्रों का जिक्र करते हुए बताया कि अपनी उपेक्षा से दु:खी मलमास जब भगवान विष्णु के पास पहुंचा तो वह उसे श्रीकृष्ण के पास ले गए और उनसे उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया। भगवान श्रीकृष्ण ने उसे स्वीकार करते हुए कहा कि उनके सभी गुण, कीर्ति, अनुभव, छहों ऐश्वर्य, पराक्रम एवं भक्तों को वरदान देने की शक्ति इस मास में भी आ जाएगी और यह पुरूषोत्तम मास के नाम से मशहूर होगा। भगवान कृष्ण ने कहा कि जो भी भक्तिपूर्वक इस मास में पूजन अर्चन करेगा वह सम्पत्ति, पुत्र, पौत्र आदि का सुख भोगता हुआ गोलोक धाम को प्राप्त करेगा।




दानघाटी मंदिर के सेवायत आचार्य मथुरा प्रसाद कौशिक ने बताया कि चूंकि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गिर्राज गोवर्धन की पूजा की थी और द्वापर में गोवर्धन पूजा के समय एक स्वरूप से गिर्राज गोवर्धन में प्रवेश कर गए थे इस कारण गोवर्धन को साक्षात श्रीकृष्ण भी माना जाता है इसलिए इसकी परिक्रमा करने की होड़ लग जाती है। ऐसे में गिर्राज तलहटी में परिक्रमार्थियों की न टूटने वाली ऐसी माला बन जाती है जहां पर अपने पराये का भेद मिट जाता है।

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