
भारत देश चमत्कारों का देश माना जाता है। यहां कई आश्चर्यचकित कर देने वाली जगह हैं जिनके चमत्कारों के बारे में आज तक वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाए हैं। कई जगहों पर इसका वैज्ञनिकों द्वारा शोध चल रहा है तो कहीं पर वैज्ञनिकों ने शोध कर के छोड़ दिया है। कुछ लोग तो इसे अंधविश्वास भी कहते हैं, लेकिन जिनकी इन जगहों से आस्था जुड़ी हुई है उन लोगों को इस पर विश्वास आज भी बना हुआ है। तो आइए इन सभी के बीच एक जगह के बारे में जानते हैं जहां एक ऐसा कुंड है जिसके बारे में कहा जाता है की यहां स्नान करने से चर्म रोगी के रोग खत्म हो जाते हैं। इस कुंड को शिवकुंड के नाम से जाना जाता है…
यहां स्थापित है प्राचीन शिव मंदिर
प्राचीन शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है, भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर शिव कुंड के नाम से भी जाना जाता है। शिवकुंड, दिल्ली से करीब 60 किलोमीटर दूर हरियाणा की सीमा में स्थित है। इस मंदिर की प्रसिद्धि का प्रमुख कारण है की इस मंदिर में प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलता है, जो कि एक कुंड में एकत्र होता है। यह पानी गर्म पानी में प्राकृतिक रूप से गंधक मिली होती है। लोगों का मानना है की इस मंदिर के कुंड में स्नान करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते है। कई चिकित्सक द्वारा भी इसकी सलाह जाती है, जिनको त्वचा रोग होता है। सोमवती अमावस्या, फगुन और सावन के महीनों के दौरान बड़ी संख्या में मंदिर के कुंड में स्नान करने के लिए आते है।
वैज्ञानिक कर रहे हैं अध्ययन
वैज्ञानिक दृष्टि से भी शिवकुंड का बहुत अधिक महत्व है। समय-समय पर शोधार्थी शिवकुंड पहुंचकर अपना शोध कार्य करते हैं। जहां एक ओर वैज्ञानिकों का मानना है की कुंड से प्राकृतिक रूप से निकलने वाले जल में गंधक होता है। इस उचित मात्रा और प्रकृति के गंधक के कारण त्वचा से संबंधित रोगों में लाभ मिलता है और इस जल में अन्य प्राकृतिक तत्वों का समावेश भी है। लेकिन दूसरी ओर शिव भक्तों का मानना है कि इस कुंड पर भगवान शिव की विशेष कृपा है और उनके आशीर्वाद की वजह से ही इस कुंड से निकलने वाला गर्म जल रोगों में लाभ पहुंचाता है।
कुंड का इतिहास
सोहना के बारे में कहा जाता है कि इसे करीब 900 साल पहले बसाया गया है। राजा सावन सिंह ने सोहना बसाया था और ऋषि शौनक के नाम कर पर इस स्थान का नाम सोहना रखा गया। यहां स्थित शिव कुंड प्राकृतिक कुंड है, जिसकी खोज एक बंजारे ने की थी। जानकारों के मुताबिक इस कुंड की खोज करने वाले बंजारे का नाम चतुर्भुज था।
Published on:
05 Apr 2019 06:37 pm
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