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अगस्तेश्वर महादेव: अगस्त्य ऋषि की तपस्या से प्रसन्न हुए थे महादेव

भगवान महाकाल की नगरी में ऐसा ही एक मंदिर स्थित है जिसे अगस्तेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। 

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Abha Sen

Aug 25, 2015

agasteshwar mahadev

agasteshwar mahadev

महाकाल की नगरी के नाम से भी पहचाने जाने वाले उज्जैन में जगह-जगह देवों का वास है। कण-कण में महादेव का वास मिलता है। ऐसा ही एक मंदिर यहां स्थित है जिसे अगस्तेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर से जुड़ी कथा

मंदिर हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित संतोषी माता मंदिर परिसर में है। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख के अनुसार जब दैत्यों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली तब निराश होकर देवता पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे। वन में भटकते हुए एक दिन उन्होंने सूर्य के समान तेजस्वी अगस्तेश्वर तपस्वी को देखा।

देवताओं के हाल को देखकर अगस्त्य ऋषि क्रोधित हुए। फलस्वरूप ज्वाला उत्पन्न हुई और स्वर्ग से दानव जलकर गिरने लगे। भयभीत होकर ऋषि आदि पाताल लोक चले गए। इससे अगस्त्य ऋषि दुःखी हुए। वे ब्रह्माजी के पास गए और कहने लगे कि मैंने ब्रह्म हत्या की है।

अतः ऐसा उपाय बताओ जिससे मेरा उद्धार हो। ब्रह्मा ने कहा कि महाकाल वन के उत्तर में वट यक्षिणी के पास उत्तम लिंग है। उनकी आराधना से तुम पाप से मुक्त हो जाओगे। ब्रह्माजी के कथन पर अगस्त्य ऋषि ने तपस्या की और भगवान महाकाल प्रसन्न हुए।

भगवान ने उन्हें वर दिया कि जिस देवता का लिंग पूजन तुमने किया है, वे तुम्हारे नाम से तीनों लोकों में प्रसिद्ध होंगे। जो मनुष्य भावभक्ति से अगस्तेश्वर का दर्शन करेगा, वह पापों से मुक्त होकर सभी मनोकामनाओं को प्राप्त करेगा। तभी से श्रावण मास में विशेष रूप से अगस्तेश्वर महादेव की आराधना श्रद्धालुजन करते हैं।

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