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भोलेनाथ के इस शिवालय में झूठी सौगंध खाने पर हो जाता है अनर्थ, सावन में लगता है भक्तों का तांता

भोलेनाथ के इस शिवालय में झूठी सौगंध खाने पर हो जाता है अनर्थ, सावन में लगता है भक्तों का तांता

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Tanvi Sharma

Aug 11, 2018

SHIV MANDIR

भोलेनाथ के इस शिवालय में झूठी सौगंध खाने पर हो जाता है अनर्थ, सावन में लगता है भक्तों का तांता

सावन माह चल रहा है और इस माह में लगभग सभी शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। सावन माह में भोलेनाथ की कृपा व उनका आशीर्वाद सभी पाना चाहते हैं। वहीं भगवान शिव के भक्त उनकी आराधना में बड़ी आस्था और भक्ति के साथ लीन हैं। वहीं हम आपको आज भगवान शिव के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां शिवालय में जाने वाला कोई भी भक्त उनकी झूठी कसम नहीं खा सकता जो भी मंदिर में झूठी कसम खाता है, किवदंतियों के अनुसार कहा जाता है की उसके साथ कुछ ना कुछ अनहोनी घटित होती है। मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है की यहां 842 साल से अखंड ज्योत जल रही है।

हम जिस प्राचिन मंदिर की बात कर रहे हैं वह मंदिर मध्यप्रदेश के भिंड शहर के बीचों-बीच बना है। यह मंदिर वनखंडेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। वनखंडेश्वर महादेव मंदिर से लोगों की आस्था काफी जुड़ी हुई है। आस्था से जुड़ा इस मंदिर में एक ऐसी विशेषता है की लोग यहां दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर के भीतर कोई भी व्यक्ति झूठी कसम नहीं खा सकता। जो भी ऐसा करता है उसके साथ अनहोनी घटित होती है।

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के समय में हुआ था और तभी से यहां अखंड ज्योत जल रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन के हर सोमवार को भगवान वनखंडेश्वर महादेव का अभिषेक कर पूजा अर्चना करने से मनचाही मुराद जल्द पूरी होती है। इस मंदिर के भीतर अखंड ज्योत तभी से निरंतर जल रही है।

मंदिर में सौगंध लेने आते हैं लोग

स्थानीय लोगों का कहना है की यहां सावन माह में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। सावन के सोमवारों में यहां आसपास के इलाकों के लोग अपने पुराने लड़ाई-झगड़ों और चोरी-डकैती के संदेही व्यक्तियों को सौगंध दिलवाने लाते हैं। लोगों का कहना है की जो व्यक्ति गलत होता है वह खुद इस मंदिर में सौगंध लेने व यहां आने से डरता है। सावन के दिनों में इस प्राचीन शिव मंदिर पर मेले का नजारा देखने को मिलता है।

मंदिर से जुड़ी किवदंती

किवदंती है कि मंदिर के स्थान पर केवल जंगल था। राजा पृथ्वीराज चौहान 1175 में महोबा के चंदेल राजा से युद्ध करने भिंड से गुजरे थे। यहां से गुजरते वक्त उन्होंने डेरा डाला और तंबू गाढ़ने के लिए उन्होंने यहां खुदाई की तो जमीन से शिवलिंग निकला। उसके बाद ही पृथ्वीराज चौहान ने इस जगह मंदिर बनवाकर इस शिवलिंग की स्थापना करा दी। शिवलिंग की स्थापना के बाद यहां उन्होंने अखंड ज्योत जलाई थी। जो अखंड ज्योत आज तक वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में प्रज्वलित है। उसके बाद से ही इस मंदिर को वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है और दूर-दूर से भक्त यहां सावन माह में कांवर लेकर और अपनी मुरादें लेकर इस मंदिर में आते हैं।