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बायोगैस प्लांट में गोबर से तैयार गैस से बन रहा भोजन

जतारा ब्लाक में लगभग दर्जनभर बायोगैस लांट स्थापित होने से किसानों को दोहरा लाभ मिल रहा है। अव्वल तो यह कि बायोप्लांट स्थापित होने से गोबर से बनने वाली गैस से महंगी एलपीजी गैस सिलेंडर से राहत मिल रही है, वहीं इस प्लांट में गोबर के अवशेष उर्वरक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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 Cattle herders get relief from expensive LPG gas

Cattle herders get relief from expensive LPG gas

टीकमगढ़. जतारा ब्लाक में लगभग दर्जनभर बायोगैस लांट स्थापित होने से किसानों को दोहरा लाभ मिल रहा है। अव्वल तो यह कि बायोप्लांट स्थापित होने से गोबर से बनने वाली गैस से महंगी एलपीजी गैस सिलेंडर से राहत मिल रही है, वहीं इस प्लांट में गोबर के अवशेष उर्वरक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
पशुपालकों किसानों को बड़ी राहत देने के लिए सरकार के द्वारा उनके यहां पर बायोगैस प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं। देसी गोबर का उपयोग कर बायोगैस प्लांट में गोबर डालकर गैस को तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को अब एसपीजी गैस सिलेंडर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वहीं किसानों को देसी गोबर का खाद भी मिलेगा। इस पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए कृषि विभाग के द्वारा किसानों को जागरूक कर इस योजना से लाभान्वित करने का काम शुरू कर दिया गया है।
जतारा विकास खण्ड में कृषि विभाग के माध्यम से 10 किसानों के यहां बायोगैस प्लांट स्थापित कराए गए है। बायोगैस प्लांट स्थापित होने से उनके घरों में गैस का उपयोग होने लगा है।
प्लांट में गोबर के अवशेष उन्नत खाद
विदित हो कि सरकार के द्वारा कृषि विभाग में २० साल पहले पशुपालन करने वाले किसानों के लिए सरकार ने बायोगैस प्लांट स्थापित करने के लिए योजना शुरू की थी। लेकिन विभाग की अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते यह योजना विलुप्त सी हो गई। सरकार ने एक बार फिर इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए कृषि विभाग को सक्रिय कर दिया है। योजना के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में 10 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। सरकार की मंशा है कि किसान पशुपालन कर दूध-दही व घी से अपनी आय बढ़ा सकते हैं, वहीं बायोगैस प्लांट से उत्पन्न गैस से एलपीजी सिलेंडर (रसोई गैस) से राहत मिलेगी और गोबर के अवशेष खेतों में बेहतरीन खाद का काम करेगा। इससे किसानों को दोहरा नहीं बल्कि तिहरा लाभ मिलेगा। इस अभियान को गति देने के लिए कृषि विभाग के द्वारा किसानों को चयनित कर उनके यहां पर गोबर गैस प्लांट स्थापित कर दिया गया है। इस योजना में किसानों को शासन की ओर से सब्सिडी भी दी जा रही है।

इन किसानों के यहां लगाए गए प्लांट
जतारा विकास खण्ड में कृषि विभाग के माध्यम से पशुपालन करने वाले किसानों के यहां पर बायोगैस प्लांट स्थापित कराए गए हैं जिनमें सामान्य वर्ग के लिए पांच, अनुसूचित जनजाति के लिए चार किसानों को बायोगैस प्लांट के लिए चयन किया गया। चयनित किसानों में रनवीर सिंह पुत्र रामसिंह ठाकुर शाह, अभियंत सिंह पुत्र महेंद्र पाल सिंह, सरवन लाल पुत्र मुकुंदी चढ़ार दिगौड़ा, नेपाल सिंह घोष लुहरगुवा, विक्रम सिंह पुत्र प्रकाश घोष लुहरगुवां, सुजान सिंह पुत्र फुदीलाल, रामादेवी पत्नी मनोहर अहिरवार बम्हौरी बराना, सुगन पत्नी घनश्याम अहिरवार बम्हौरी बराना, उत्तम पुत्र जया प्रसाद रतगुवा भाटा को इस योजना के माध्यम से लाभान्वित किया गया । इन चयनित किसानों के यहां बायोगैस प्लांट स्थापित करा दिए गए हैं जिससे उनके घरों पर देशी गोबर से तैयार गैस का उपयोग होने लगा है।


योजना के तहत दी जा रही सब्सिडी
इस योजना की लागत एक प्लांट पर 35 हजार रुपए खर्च होता है, जिसमें पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजाति के किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान राशि कृषि विभाग के माध्यम से दी जाती है। वहीं सामान्य वर्ग के किसानों को 14 हजार रुपए अनुदान राशि शासन की ओर से दी जा रही है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने का काम भी किया जा रहा है जिससे देसी खाद और गैस उपलब्ध होने से समय और पैसे की भी बचत होगी।
इनका कहना
पशुपालन करने वाले किसानों के यहां पर बायोगैस प्लांट स्थापित करने की यह महत्वपूर्ण योजना है। इससे किसानों के गोबर गैस प्लांट स्थापित करा कर उनको गैस भी उपलब्ध होने लगी है और देशी खाद भी।
अशोक कुमार खरे, कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विभाग

किसानों को जैविक खेती, ईंधन की आपूर्ति और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की गई है। जतारा विकासखंड में 10 किसानों के यहां बायोगैस प्लांट स्थापित कराने का लक्ष्य मिला था, जिसमें 9 किसानों के यहां पर बायोगैस प्लांट लगाए जा चुके हैं।
आशीष कुमार गुप्ता, एसडीओ, कृषि विभाग जतारा