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हे राम, कितना अमानवीय होते जा रहे हम, भूख-प्यास से गायों की मौत

फसलों को बचाने आंगनबाड़ी में बंद कर दी गाय, भूख-प्यास से मौत

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Maharashtra Panvel Crime News

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टीकमगढ़. किसान तो अन्नदाता है। वह तो सब का पेट भरता है। फिर गोमाता कही जाने वाली गाय के लिए वह इतना अमानवीय कैसे हो सकता है। आंगनबाड़ी में बंद और भूख से मरने वाली गायों के वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो लोग यही सोचते दिखाई दिए। यह वीडियो देखकर हर कोई अंदर तक सिहर उठा। मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन इसकी जांच कराने की बात कह रहा है।


गुरुवार की सुबह से सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए। यह वीडियो जतारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत वर्माताल के बताए जा रहे है। इनमें पंचायत के पुराने आंगनबाड़ी भवन में आधा दर्जन से अधिक गाय बंद दिखाई दे रही है तो दो से तीन गायों की यहां पर मौत होना बताया जा रहा है। जो गाय बंद है उनके पैर बंधे है और कुछ के सींगों पर ग्रामीणों द्वारा लकड़ी बांधी गई है। बताया जा रहा है तो गाय मरी है वह भूख से मरी है। इन गायों को यहां पर बंद करने का कारण किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाना बताया जा रहा है। यह गाय किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाती थी, ऐसे में इन गायों को यहां पर बंद किया गया था। फसलों को बचाने गायों को बंद करना तो समझ में आता है, लेकिन भूख से इनकी मौत होना लोगों की अमानवियता को प्रकट करता है। गायों की भूख से मौत होना यह भी दर्शाता है कि यह गाय कम से कम एक पखवाड़े से अधिक समय से यहां बंद थी। ऐसे में यह घटना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। इतने दिनों तक गायों के बंद रहने की जानकारी किसी को नहीं हुई क्या और यदि हुई तो किसी ने इनकी सुरक्षा के लिए प्रयास क्यों नहीं किया गया, यह सवाल भी लोगों के जेहन में उठ रहे है।

शिकायत आने पर की गई सफाई
बताया जा रहा है कि यह वीडियो वायरल होने के बाद जब जतारा एसडीएम डॉ अभिजीत सिंह ने इसकी जानकारी ली तो दो दिन पहले पंचायत द्वारा यहां से गायों को मुक्त किया गया और यहां पर सफाई कराई गई। एसडीएम सिंह का कहना है कि उन्होंने इसकी जांच करने के निर्देश दिए है। उनका कहना था कि जांच के बाद दोषियों का पता किया जा रहा है और गायों की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है।

केवल गोशाला बनाने में रूचि
विदित हो कि शासन द्वारा खुली घूम रही गायों की व्यवस्था करने के लिए मनरेगा से गोशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही तमाम जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान केवल गोशाला बनवाने तक ही सीमित है। जिले में 35 से 80 लाख रुपए तक की गोशालाएं बड़े शान से बनवाई जा रही है। जनप्रतिनिधि भी भूमिपूजन से लेकर लोकापर्ण करा रहे है, लेकिन इसके बाद बंद पड़ी गोशालाओं और सड़कों पर घूमते गोवंश पर किसी का ध्यान नहीं है।