टीकमगढ़

बस्ते का बोझ कम करने डीपीसी ने जारी किए निर्देश

बीआरसी को स्कूल बैग पॉलिसी का पालन कराने जारी किया पत्र

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DPC issued instructions to reduce the burden of bags

टीकमगढ़. नौनिहालों को बस्तें के बोझ से निजात दिलाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल बैग पॉलिसी जारी की गई है, इसके बाद भी प्रायवेट स्कूलों द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है और नौनिहाल 8 से 10 किलो वजनी बैग लेकर स्कूल जा रहे है। इस मामले में पत्रिका ने 15 अक्टूबर के अंक में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर को गंभीरता से लेते हुए डीपीसी प्रकाश नायक ने बैग पॉलिसी का पालन कराने के निर्देश दिए है।


विदित हो कि प्रायवेट स्कूलों की मनमर्जी पर अंकुश लगाते हुए बच्चों को फिजूल की कीताबों से बचाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा बैग पॉलिसी बनाई गई थी। इस बैग पॉलिसी के तहत कक्षा 10वीं तक छात्रों के बैग का वजन 4.5 किलो से अधिक नहीं होने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी प्रायवेट स्कूलों द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों को भी 8 से 10 किलो के बैग पीठ पर लादकर स्कूल जाना पड़ रहा था। पत्रिका ने बच्चों एवं अभिभावकों की इस समस्या को देखते हुए 15 अक्टूबर के अंक में बोझ तले दबता बचपन: खुद के वजन से आधे के बस्ते लेकर स्कूल जा रहे नौनिहाल शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया था।

जारी किए निर्देश
इस मामले में डीपीसी प्रकाश नायक ने बताया कि उन्होंने स्कूल बैग पॉलिसी लागू होते ही सभी बीआरसी को इसका पालन करने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में 16 सितंबर को पत्र जारी किया गया था। वहीं खबर प्रकाशन के बाद सभी को निर्देश दिए गए है कि वह हर स्कूल में जाकर इस पॉलिसी का पालन कराना सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि बच्चों के बस्तों का बढ़ता बोझ वास्तव में समस्या है। इससे न बच्चों के विकास में बाधा आने के साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। उनका कहना है कि इस पॉलिसी पर पूरी तरह अमल किया जाएगा और पॉलिसी के आधार ही बच्चों के बस्तें का वजन करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
दबाव में अभिभावक
वर्तमान में प्रायवेट स्कूलों की इस मनमर्जीे के आगे अभिभावक भी दबाव में दिखाई दे रहे है। बच्चों की चिंता कर अभिभावक भी बिना किसी विरोध के मौन साधे हुए है। ऐसे में बच्चों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों की माने तो प्रायवेट स्कूलों द्वारा दी जाने वाली बहुत सी किताबें तो किसी काम की नहीं है, लेकिन बच्चों की सोच कर सब लेनी पढ़ रही है।

Published on:
12 Nov 2022 08:31 pm
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