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सीखो कमाओ योजना में युवाओं को रोजगार देने से कतरा रहे व्यवसायी

4500 पंजीकृत युवाओं में से सिर्फ 22 को मिला वास्तविक रोजगार

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4500 पंजीकृत युवाओं में से सिर्फ 22 को मिला वास्तविक रोजगार

4500 पंजीकृत युवाओं में से सिर्फ 22 को मिला वास्तविक रोजगार

टीकमगढ़ केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई सीखो कमाओ योजना जिले में अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। योजना के तहत रोजगार देने में जहां व्यवसायी रुचि नहीं ले रहे, वहीं जिला प्रशासन की सक्रियता भी सवालों के घेरे में है।

जिले में इस योजना के तहत 4500 से अधिक युवाओं ने पंजीयन कराया था, लेकिन प्रशिक्षण के बाद केवल 94 युवाओं को रोजगार मिला। जिनमें से वर्तमान में सिर्फ 22 युवा ही कार्यरत है। शेष युवा बेरोजगारी की मार झेलते हुए विभागों के चक्कर काटने को मजबूर है।

उद्योगों की कमी बनी बड़ी बाधा

बताया गया कि जिले में बड़े उद्योग.धंधों का अभाव है। योजना के तहत जिले में केवल 210 पदों की ही उपलब्धता थी। अधिकांश प्रतिष्ठान ईपीएफ जैसी सुविधाएं देने में सक्षम नहीं है। जबकि योजना का लाभ मुख्यत: संगठित क्षेत्र के युवाओं को दिया जाना था।

चार विकल्पों में दिया जा रहा वेतन

आइटीआइ कॉलेज में योजना के प्रभारी ने बताया कि इस योजना में चार विकल्प दिए गए है। विकल्प में कक्षा 12 वींए डिप्लोमा धारीए प्रोजेक्ट और स्नातक के लिए अलग.अलग वेतन चयन किए गए है। कक्षा 12 वीं के लिए 8 हजार रुपएए डिप्लोमाधारी के लिए 8500 रुपएए प्रोजेक्ट वाले छात्र को 9 हजार रुपए और स्नातक के लिए 10 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दी जाएगी।

यह करना था प्रयास

शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार की सबसे अच्छी योजना है। इस योजना में पंजीयन वाले युवाओं को प्रशिक्षण में लाने के लिए जनपद पंचायत स्तर पर जिला प्रशासन द्वारा शिविर आयोजित किए जाने थे। श्रम विभागए नापतौल विभागए खाद सुरक्षा विभाग और खाद्य विभाग के सहयोग से पंजीकृत युवाओं को प्रतिष्ठानों पर रोजगार दिलाना था।

जिले में बड़े उद्योग धंधे नहीं है। पिछले वर्षों में ४५०० युवाओं ने रोजगार के लिए पंजीयन कराया था। उनमें से ९४ को रोजगार दिया गया था। आज सिर्फ २२ युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है। मुख्य कारण यह है कि यहां पर बड़े उद्योग धंधे न होने के कारण युवाओं को ईपीएफ नहीं मिल रहा है।

विजय सिंह, प्राचार्य आईटीआई टीकमगढ़।

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